hindi

एक ऐसा देश जहां मच्छरो को मारना माना जाता है घोर पाप

0 7

रात के वक्त यहां बहुत मच्छर होते हैं। जिनके कारण हम सो नहीं पाते। युवा माधवी मुस्कुराते हुए यह बात बताती हैं कि उनका परिवार धान की खेती करता था। और जानवर पालकर अपना गुजर-बसर करता था। आपको बता दें कि माधुरी भूटान के दक्षिणी इलाके में स्थित गांव की रहने वाली है। माधवी का परिवार शाम के वक्त के चैन में गुजारता है। वहां वह खुले में चूल्हे में खाना पकाते हैं। इससे दूर से कीड़े मकोड़े भाग जाते हैं।

इतना ही नहीं वह भी बताती है कि उन्होंने 10वीं तक पढ़ाई की है। वो भी मुंहजबानी और सरकारी अभियानों की मदद से उन्हें मलेरिया और उन्हें डेंगू के खतरों का अच्छे से अंदाजा है। दोनों ही बीमारियां मच्छरों से फैलती हैं। माधवी का परिवार कभी भी अपनी रिहाइश के आस-पास पानी नहीं रुकने देता।वो मच्छरदानी लगाकर सोते हैं, जिन्हें सरकार की तरफ से बांटा गया है। माधवी के 14 महीने के बच्चे के लिए एक खटोला है। उसमें भी मच्छरदानी लगी हुई है।

शर्मा परिवार के घर में साल में दो बार कीटनाशकों का छिड़काव होता है। हालाकिं लोगों को मच्छरों के खतरे के प्रति जागरूक करना है। यह सब भूटान सरकार के मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम का हिस्सा है। यह कार्यक्रम 1960 के दशक से शुरू हुआ था। लेकिन इसका असर 1990 के बाद दिखना शुरू हुआ।

1994 में भूटान में मलेरिया केस के 40,000 से ज्यादा मामले सामने आए। इन मामलों में आठ लोगों की मौत हो गई। लेकिन साल 2018 आते-आते मलेरिया के केवल 54 केस सामने आए। इनमें से केवल 6 ही भूटान के मूल निवासी थे। मलेरिया से भूटान में 21 साल के एक सैनिक की मौत हो गई है। यह सैनिक भूटान की भारत से लगने वाली सीमा पर तैनात था। वह अस्पताल इतनी देर से पहुंचा कि डॉक्टरों ने उसे मरा हुआ घोषित कर दिया।

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.