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INTERESTING FACTS; जानिए आखिर कब पलकें होती है भारी, पलकों का नींद से क्या है सम्बन्ध

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हमारे शरीर के लिए नींद उतनी ही जरूरी होती है। जितनी कि अन्य क्रियाएं जैसे पाचन स्वास्थ्य रक्षक परिसंचरण उत्सर्जन आदि एक अच्छी नींद एक अच्छे स्वास्थ्य की निशानी होती है। पृथ्वी पर उपस्थित लगभग सभी जीवो को नींद की आवश्यकता होती है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि मनुष्य अपने जीवन का लगभग दो तिहाई हिस्सा सोने में निकाल देता है।

नींद हमें अपनी उर्जा को भंडारे करने की शक्ति प्रदान करती है। अगर हम पर्याप्त मात्रा में नींद नहीं लेते हैं या लंबे समय तक नहीं सोते हैं तो हमें थकान होती है अलग-अलग जीवो में नींद अलग-अलग प्रकार की होती है। और अलग-अलग जीव को अलग-अलग प्रकार नींद चाहिए होती है। जैसे जिराफ और घोड़े खड़े-खड़े ही सो जाते हैं हाथी सिर्फ 2 घंटे की नींद लेता है। बिल्ली कम से कम 15 घंटे की नींद ले ली है। जबकि एक आम व्यक्ति को 7 से 8 घंटे की नींद चाहिए होती है।

हमारे शरीर में नींद का आना सिरकैडियन रिदम होता है यह हमारे शरीर की प्राकृतिक घड़ी के रूप में कार्य करते हैं। जो हमारे सोने और जागने की क्रिया को नियंत्रित करती है। प्रत्येक 24 घंटे में यह अपने आप को दोहराती रहती है। जब हमारी आंखो द्वारा दिमाग तक नींद आने का सिग्नल पहुंचता है तो मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस में स्थित केंद्रक जो कि लगभग 20,000 तंत्रिका कोशिकाओं या नर्वस सेल से बना होता है। उसमें विशेष प्रकार का एक हारमोनियास नहीं कि मेलाटोनिन का श्रवण किया जाता है।

जब हम बहुत ज्यादा थके हुए होते हैं या बहुत लंबे समय से सो ही नहीं होते हैं। तो इस हार्मोन मेलाटोनिन कर श्रावक बहुत अधिक मात्रा में होता है जिसके कारण हमारी पलकों में भारीपन महसूस होता है। थकान भी एक प्रकार की समस्या की स्थिति में होती है मतलब थकान होने पर हमारा शरीर अपने आप को अनुकूलित कर लेता है।

अगर सरल शब्दों में समझा जाए तो शरीर के तमाम अनुमति को सिग्नल देकर बताते हैं कि वह और ज्यादा काम नहीं कर सकते और अब उन्हें आराम की जरूरत है। जिससे शरीर के महत्वपूर्ण अंग जब यह संदेश मस्तिष्क तक पहुंचाते हैं तो पलके अपने आप ही दबना शुरू हो जाती हैं।

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