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अगर चाचा ने ना देखा होता तो क्रिकेटर नहीं मछुआरे होते सुनील गावस्कर

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सुनील गावस्कर की गिनती दुनिया के महानतम बल्लेबाजों में होती है. गावस्कर ने वेस्टइंडीज जैसी धाकड़ टीम के खिलाफ अपनी पहली ही टेस्ट सीरीज में कमाल कर दिया था. उन्होंने चार मैचों की 8 पारियों में 774 रन बनाए थे. इस सीरीज में उन्होंने 4 शतक और 3 अर्धशतक भी लगाए थे, जिसमें एक दोहरा शतक भी शामिल था. आज तक कोई भी भारतीय बल्लेबाज एक टेस्ट सीरीज में इतने रन नहीं बना सका है. आज सुनील गावस्कर अपना 72वां जन्मदिन मना रहे हैं. सुनील गावस्कर के जीवन से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी हम आपको बता रहे हैं.

अगर उनके चाचा ने देखा ना होता तो शायद सुनील गावस्कर क्रिकेटर नहीं मछुआरे बन जाते. सुनील गावस्कर ने गौरव कपूर के शो पर यह किस्सा सुनाया था. उन्होंने बताया था कि मैं जुहू के पास पुरंदरे मेटरनिटी होम में पैदा हुआ था. तब मेरे अंकल मुझे देखने आए. उन्होंने गौर किया कि मेरे कान में एक छोटा सा छेद है. मुझे देखने के बाद वह चले गए और एक दो दिन बाद फिर मुझे मिलने मेटरनिटी होम आए. तब मेरी मां जनरल वार्ड में भर्ती थी. उन्होंने मां से बच्चे को लिया. लेकिन उसके कान के पास छेद नजर नहीं आने पर वह हैरान रह गए. उन्होंने तुरंत मां से कहा कि ये हमारा बच्चा नहीं है जिसके बाद मेटरनिटी होम में हंगामा मच गया.

अस्पताल प्रबंधन को बताया गया कि हमारे बच्चे के कान में छेद था. लेकिन अभी नहीं है. इसके बाद बच्चे को ढूंढना शुरू किया गया. तब गावस्कर एक बेड पर महिला के पास मिले, जो मछुआरा समुदाय की थी. बाद में पता चला कि बच्चों को नहलाने के दौरान अदला-बदली हो गई थी. अगर सुनील गावस्कर के चाचा ने यह गलती ना पकड़ी होती तो शायद आज वह कुछ और ही कर रहे होते.

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