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दादा की वजह से क्रिकेट के दिग्गज बन सके ये पांच भारतीय क्रिकेटर

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1999-2000 में भारतीय क्रिकेट टीम बहुत ही मुश्किल हालातों से गुजर रही थी. 2000 में फिक्सिंग कांड के बाद भारतीय टीम का कप्तान सौरव गांगुली को बनाया गया. सौरव गांगुली वही खिलाड़ी है जिन्होंने भारतीय टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और भारतीय क्रिकेट को एक नया दृष्टिकोण दिया और टीम इंडिया को विदेशी धरती पर भी जितना सिखाया. सौरव गांगुली की गिनती भारत के सबसे सफल कप्तानों में की जाती है. लेकिन दुर्भाग्यवश सौरव गांगुली की कप्तानी में भारतीय टीम एक भी आईसीसी का खिताब नहीं जीत सकी. हम आपको उन 5 खिलाड़ियों के बारे में बता रहे हैं जो कि गांगुली की कप्तानी में खेलकर क्रिकेट के दिग्गज बने.

महेंद्र सिंह धोनी

महेंद्र सिंह धोनी का कैरियर बनाने में सौरव गांगुली की महत्वपूर्ण भूमिका रही. साल 2004 में माही ने भारतीय टीम में डेब्यू किया और 2005 की शुरुआत में टीम इंडिया में जगह बनाई. धोनी से उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन निकलवाने के लिए दादा ने शुरुआती दिनों में अपनी नंबर 3 की पोजीशन छोड़ दी थी. हालांकि धोनी ने भी दादा को निराश नहीं किया और अपने करियर की शुरुआत में ही छाप छोड़ना शुरू कर दिया. धोनी ने बतौर कप्तान भारतीय टीम के लिए 3 आईसीसी की ट्रॉफी जीती है.

वीरेंद्र सहवाग

भारतीय टीम के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने अजय जडेजा की कप्तानी में डेब्यू किया था और वह नंबर 6 पर बल्लेबाजी करते थे. 2002 में पहली बार सौरव गांगुली की कप्तानी में सहवाग को इंग्लैंड दौरे पर ओपनिंग करने का मौका मिला. जिसके बाद सहवाग ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और वह विस्फोटक सलामी बल्लेबाज बन गए.

हरभजन सिंह

हरभजन सिंह भारतीय टीम के सबसे सफल स्पिनरों में से एक थे. हरभजन ने 100 से ज्यादा टेस्ट मैच के लिए और 400 से ज्यादा विकेट हासिल किए. हरभजन अपनी सफलता का श्रेय गांगुली को देते हैं. क्योंकि वह गांगुली ही थे जिन्होंने 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज के लिए हरभजन सिंह को चुनने के लिए चयनकर्ताओं को राजी किया था.

युवराज सिंह

18 साल की उम्र में युवराज सिंह ने साल अक्टूबर 2000 में भारतीय टीम में डेब्यू किया. युवराज का कैरियर बनाने में सौरव गांगुली की महत्वपूर्ण भूमिका रही. करियर के शुरुआती चरण में गांगुली ने युवा खिलाड़ियों पर भरोसा दिखाया और उन्होंने भी कप्तान को निराश नहीं किया.

अशोक डिंडा

अशोक डिंडा ने भले ही भारतीय टीम के लिए लंबे समय तक क्रिकेट ना खेल हो. लेकिन वह अपने तरीके से काफी अनमोल थे. डिंडा में उछाल और स्विंग पैदा करने की क्षमता थी. एक तेज गेंदबाज के रूप में उनमें काफी दमखम था. उनका अनोखा अंदाज कई अच्छे बल्लेबाजों को परेशान करता था.

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