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सिलेक्टर्स से लड़कर सौरव गांगुली ने वीरेंद्र सहवाग को बनाया था ओपनर, फिर टूटे सारे रिकॉर्ड

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पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने अपनी कप्तानी के दौरान कई ऐतिहासिक फैसले लिए, जिनकी बदौलत भारतीय टीम की दिशा ही बदल गई. भारतीय टीम 2000 में जब मैच फिक्सिंग विवादों से जूझ रही थी उस समय सौरव गांगुली ने टीम की कमान संभाली और भारतीय टीम को बुलंदियों पर पहुंचाया. सौरव गांगुली ने वीरेंद्र सहवाग, हरभजन सिंह, युवराज सिंह, आशीष नेहरा जैसे खिलाड़ियों को खोजा. सहवाग के करियर को संवारने में सौरव गांगुली का बड़ा योगदान रहा.

वीरेंद्र सहवाग ने 1999 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया था. लेकिन उस समय वह मध्यक्रम में बल्लेबाजी करते थे. एक बार सौरव गांगुली ने बताया था कि नवंबर 2001 में दक्षिण अफ्रीकी दौरे के दौरान सहवाग को ले जाने पर बहस हो रही थी. जब उनका चयन हुआ था तो लोगों ने कहा था कि आप उसे क्यों लेकर जा रहे हैं. वह तेज गेंदबाजों के बाउंसर को नहीं खेल पाएगा. उस समय गांगुली ने कहा था- आपने उसे मौका नहीं दिया और उस पर राय बनाने लगे.

गांगुली ने बताया कि मैंने एक दिन वीरू से कहा कि मैदान के बाहर बैठकर कोई प्लेयर नहीं बना. तू ओपन कर. कोई पैदाइश ओपनर नहीं हुआ. अगर मैथ्यू हेडन और जस्टिन लैंगर कर सकते हैं तो तू भी कर सकता है. इस पर सहवाग ने उनसे कहा था- मैंने कभी ओपन नहीं किया. मैं आउट हो जाऊंगा तो क्या करूंगा. तब गांगुली ने सहवाग से कहा था- आउट तो नीचे भी हो सकता है. इंग्लैंड में ओपन करते ही वीरेंद्र सहवाग ने 100 रन बनाए थे. गांगुली से सहवाग अक्सर कहते थे कि आपने मुझे बीच में नहीं खिलाया. इस पर गांगुली उनसे कहते थे कि अगर मिडिल ऑर्डर में खेलते तो आधा सहवाग भी नहीं बन पाते.

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