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फुटबॉल बनना चाहते थे सौरव गांगुली, लेकिन बन गए विस्फोटक ओपनर, जानिए कैसे

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भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और मौजूदा बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली आज अपना 49वां जन्मदिन मना रहे हैं. सौरव गांगुली विस्फोटक ओपनर के साथ ही भारतीय टीम को बदलने वाले कप्तान के रूप में जाने जाते हैं. उनकी कप्तानी में भारतीय टीम की दशा और दिशा दोनों बदल गए. बचपन में सौरव गांगुली फुटबॉलर बनना चाहते थे. लेकिन वह संयोगवश क्रिकेटर बन गए. उन्होंने खुद इस बात का खुलासा एक इंटरव्यू में किया था.

सौरव गांगुली गलियों में फुटबॉल खेलते थे. लेकिन उनके पिता ने उन्हें शरारतों से दूर करने के लिए क्रिकेट की कोचिंग कराने का फैसला किया, जिसके बाद वह फुटबॉल से दूर होते गए. गांगुली ने इंटरव्यू में बताया था- फुटबॉल मेरी जिंदगी थी. नौवीं कक्षा तक मैं इसमें बहुत अच्छा था. लेकिन गर्मी की छुट्टी के दौरान मेरे पिता ने मुझसे कहा कि तुम घर जाकर कुछ नहीं करोगे और मुझे एक क्रिकेट एकेडमी में डाल दिया. उस समय गांगुली के पिता पश्चिम बंगाल क्रिकेट संघ में थे.

19 साल की उम्र में सौरव गांगुली को ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर भारत के लिए डेब्यू का मौका मिला. इस मैच में वह 13 गेंदों में 3 रन बनाकर ही आउट हो गए. इसके बाद 4 साल तक टीम से बाहर रहे और फिर उन्होंने वापसी के बाद नंबर 3 पर खेले थे. लेकिन भारतीय टीम के पूर्व तेज गेंदबाज मदनलाल ने उन्हें ओपनर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो उस समय टीम इंडिया के कोच थे. गांगुली ने बताया कि मदनलाल ने उनसे कहा था कि अगर आप नंबर पांच पर ही बल्लेबाजी करते रहोगे तो कुछ नहीं होगा. आपको ओपनिंग करनी चाहिए और जैसे ही उसने ओपनिंग करना शुरू किया, उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा.

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