hindi

जब तक हमारे स्वभाव में गुस्सा और लालच रहेगा, हमारा मन शांत नहीं हो सकता

0 7

एक राजा था, जिसके पास सुख सुविधा की सारी चीजें थी. राजा के सामने हर रोज तरह-तरह के पकवान परोसे जाते थे. फिर भी राजा का मन शांत नहीं रहता था. एक दिन राजा अपने राज्य में घूम रहा था, तभी उसने एक संत को देखा, जो छोटी सी कुटिया में ध्यान लगाए बैठे थे.

राजा संत के सामने बैठ गया. जब संत ने राजा को देखा तो राजा ने उन्हें प्रणाम किया और अपनी समस्या बताई. राजा ने संता से कहा- आप मुझे कुछ उपाय बताएं जिससे मेरी समस्याएं हल हो जाए. संत ने कहा- आप ध्यान करें, आपका मन शांत हो जाएगा. राजा कुछ देर आंखें बंद करके बैठे. लेकिन उनके दिमाग में इधर-उधर की बातें चल रही थी. वह ध्यान नहीं लगा पाए और उन्होंने आंखें खोली.

राजा ने कहा- मेरे लिए यह करना बहुत मुश्किल है. संत ने कहा- चलो कुछ देर बाग में घूमते हैं. बाग में कुछ ऐसे पौधे थे जिनमें कांटे थे. राजा ने इन पौधों को छू लिया और उनके हाथ में कांटा चुभ गया और खून बहने लगा. इसके बाद संत राजा को लेकर कुटिया में पहुंचे और उनके हाथ पर लेप लगाया.

संत बोले- राजन आपके हाथ पर छोटा सा कांटा चुभा तो खून बहने लगा. इससे ज्यादा कांटे तो आपके मन में चुभे हुए हैं., गुस्सा लालच, जलन की भावना यह सभी मन के लिए कांटों की तरह है. जब तक आप इन्हें अपने मन से नहीं निकालेंगे, आपके मन को शांति नहीं मिलेगी.

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.