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अगर सोच सकारात्मक रहेगी तो बुरे समय में भी मन शांत रहेगा, सुख-दुख हमारी सोच पर निर्भर करते हैं

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एक व्यक्ति पैसा कमाने के लिए अपना गांव छोड़कर बड़े नगर में पहुंच गया. वह काफी समय तक अपने गांव से दूर रहा. गांव में उसका बड़ा और सुंदर घर था. उसने जब बहुत सारे पैसे कमा लिए तो वह वापस गांव लौट आया. वह गांव लौटा तो उसने अपना घर जलते हुए देखा. गांव के लोग दूर खड़े होकर जलता हुआ घर देख रहे थे. उस व्यक्ति को समझ नहीं आया कि क्या करना चाहिए. वह दुखी हो गया उसने लोगों से मदद मांगी. लेकिन किसी ने भी उसकी मदद नहीं की. 

तभी उस व्यक्ति का बड़ा बेटा वहां पहुंचा और उसने कहा- पिताजी आप क्यों दुख दुखी क्यों है, पिता बोले- हमारा घर जल रहा है और तुम पूछ रहे हो हम दुखी क्यों है. बेटे ने कहा- पिताजी हमने यह घर कुछ ही दिन पहले बेच दिया है. यह सुनकर व्यक्ति का मन शांत हो गया कि उसका नुकसान नहीं हुआ. अब वह भी दूसरे लोगों की तरह घर को जलते हुए देखने लगा. 

कुछ देर बाद जब उस व्यक्ति का दूसरा बेटा पहुंचा तो उसने पूछा- पिताजी अपना घर जल रहा है और आप चुपचाप खड़े होकर देख रहे हैं. पिता बोले- तुम्हारे बड़े भाई ने यह घर कुछ दिन पहले बेच दिया था. हमें चिंता करने की जरूरत नहीं है. दूसरे बेटे ने कहा- ठीक है, हमने घर बेच दिया. लेकिन हमें अभी तक पैसा नहीं मिला है. अगर खरीदार ने पैसे देने से मना किया तो. 

यह सुनकर व्यक्ति फिर दुखी हो गया. तभी उस व्यक्ति का तीसरा बेटा वहां पहुंच गया. उसने अपने पिता से कहा- पिता जी चिंता ना करें. हमें खरीददार से पैसे मिल गए. यह सुनकर व्यक्ति फिर से सामान्य हो गया.

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