hindi

मेजर धन सिंह थापा, जिनको मान लिया गया था शहीद, लेकिन फिर जिंदा वापस लौटे चीन की कैद से

0 10

भारत और चीन के बीच काफी दिनों से तनाव जारी है. हालांकि अब दोनों देशों के बीच समझौता हो गया है और सब कुछ ठीक होने की संभावना है. भारत और चीन के बीच 1962 में भी जंग हुई थी. इस जंग में धन सिंह थापा ने अपनी बहादुरी दिखाई थी. बता दें कि परमवीर चक्र विजेता कर्नल धन सिंह थापा पोस्ट के नाम पर पैंगोंग लेक के उत्‍तरी किनारे पर फिंगर 3 के करीब स्थित इंडियन आर्मी का परमानेंट बेस भी है. लेकिन उनके नाम पर एलएसी के करीब एक पोस्ट क्यों बनाई गई. आइए जानते हैं.

1961 में चीन की आक्रामकता बढ़ती जा रही थी जिसके जवाब में भारत ने बड़ा फैसला लिया और भारतीय सेना को बड़े स्तर पर तैनात कर दिया गया. चीन की बढ़ती दखलंदाजी के जवाब में भारतीय सेना की तरफ से विवादित हिस्सों में कई छोटी-छोटी पोस्ट बनाई गई. अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में जंग शुरू हुई, जिसके कुछ दिन पहले ही 8 गोरखा राइफल्‍स को सिरिजैप कॉम्‍प्‍लेक्‍स की तीन पोस्‍ट्स पर तैनात कर दिया गया. 

सितंबर 1962 में चीन की सेना ने हमला कर दिया था. मेजर धन सिंह थापा सिरिजैप 1 को को कमांड कर रहे थे. उनके पास लगभग 30 जवान ही इसकी सुरक्षा के लिए थे. उनकी बेटी की अचानक मौत हो गई, जिसके लिए मेजर थापा को एक हफ्ते की छुट्टी दी गई थी. लेकिन उन्होंने अपनी कंपनी को ना छोड़ने का फैसला किया. चीन के साथ युद्ध के हालात में वह घर नहीं जाना चाहते थे.

20 अक्टूबर 1962 को चीनी सेना ने भारतीय सेना पर हमला कर दिया. भारतीय सेना के पास चीनी सेना की अपेक्षा काफी कम हथियार थे. लेकिन  मेजर थापा लड़ते रहे और बाकी जवानों को प्रेरित करते रहे. उनके शब्‍द थे- हमें मरना है और हम सब साथ में मरेंगे लेकिन मरने से पहले कुछ को मार कर ही मरना है.

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.