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क्या है मिलिट्री जेट फ्यूल, जो बाकी एयर क्राफ्ट में भरे जाने वाले तेल से होता है अलग

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हवाई जहाज और मिलिट्री जेट में काफी अंतर होता है. दोनों के फंक्शन भी एक दूसरे से भिन्न होते हैं. हालांकि जो फ्यूल सामान्य एयरक्राफ्ट में इस्तेमाल होता है वह मिलिट्री जेट और फाइटर जेट में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. आज हम आपको बताएंगे कि मिलिट्री जेट फ्यूल और साधारण एयरक्राफ्ट के फ्यूल में क्या अंतर होता है.

तीन तरह का फ्यूल 

एवियशन फ्यूल यानी हवाई जहाज में डाला जाने वाला तेल 4 तरह का होता है- जेट फ्यूल, एविएशन गैसोलिन, जेट बी और बायोकेरोसिन. 

जेट फ्यूल को Jet A-1 टाइप का एविएशन फ्यूल भी कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल सिविल एविएशन में टरबाइन इंजन के लिए होता है. इसे बेहद सावधानी से रिफाइंड किया जाता है. यह लाइट पेट्रोलियम होता है जो केरोसिन टाइप होता है. रिफाइन होने के बाद इसमें कुछ और पदार्थ मिलाए जाते हैं, जिसकी वजह से फ्यूल अनियंत्रित होकर जलने से बचता है. साथ ही इसमें कुछ ऐसे पदार्थ मिलाए जाते हैं जो इसे फ्रीज होने से बताते हैं.

केरोसिन-गैसोलिन मिक्‍सचर

यह वो एविएशन फ्यूल  है जो मिलिट्री जेट्स के लिए इस्तेमाल होता है. यह ग्रेड जेट B जिसे JP-4 भी कहते हैं. यह स्पेशल ब्‍लेंड होता है जिसमें 65 प्रतिशत गैसोलिन और 35 प्रतिशत केरोसिन मिलाया जाता है. इसे ज्यादा तापमान वाले क्षेत्रों में इस्तेमाल नहीं किया जाता. बहुत ज्यादा कम तापमान वाले क्षेत्रों में भी इसका इस्तेमाल कम से कम होता है.

एविएशन गैसोलिन 

एविएशन गैसोलिन को एवीगैस के तौर पर भी जानते हैं, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर सपोर्ट्स एयरक्राफ्ट और प्राइवेट जेट्स के इंजनों के लिए होता है. यह बहुत महंगा होता है.

बायो केरोसीन 

यह फॉसिल फ्यूल है जिसका लंबे समय तक प्रयोग काफी महंगा होता है. यह केरोसिन और बायोफ्यूल का मिक्‍सचर है. एविएशन इंडस्‍ट्री पिछले कई वर्षों से इसकी टेस्टिंग कर रही है.

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