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10 रुपये का पलाश का पौधा लोगों का बचाता है 10000000 रुपए का खर्चा

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क्या आपने पलाश के पौधे के बारे में सुना है. नर्सरी में ₹10 में मिलने वाला यह पौधा इंसानों के 10000000 रुपए बचाता है. यह पौधा पर्यावरण में नाइट्रोजन की मात्रा को भी बैलेंस करता है. अगर पलाश का पेड़ खत्म हो जाए तो जैसे चीन के चौराहों पर ऑक्सीजन के सिलेंडर खोले जाते हैं, उसी तरह भारत में नाइट्रोजन के सिलेंडर खोलने पड़ेगे. अगर पलाश का पौधा खत्म हो जाए तो सरकार टैक्स बढ़ा देगी. नाइट्रोजन गैस बनाने की फैक्ट्रियां शुरू करनी पड़ेगी. नाइट्रोजन की फैक्ट्री को पेमेंट देने के लिए सरकार जनता पर टैक्स लगाएगी.

क्या काम आता है पलाश 

पूजा में प्रयुक्त चम्मच पलाश के पेड़ से बनती है, जिसका इस्तेमाल यज्ञ, अनुष्ठान आदि में घी डालने में होता है. पलाश के फूल का प्रयोग गरम मसाला बनाने में किया जाता है. प्राचीन काल में पलाश के फूलों को सुखाकर होली खेलने वाले रंग तैयार किए जाते थे. पलाश की लकड़ी फर्नीचर बनाने में काम आती है.

मेडिकल साइंस में भी महत्वपूर्ण है पलाश

पलाश का रस किसी टॉनिक से कम नहीं है. इसके बीज एंटीपैरासाइटिक होते हैं. इसकी छाल एंटीमाइक्रोबियल और एंटीऑक्सीडेंट का काम करती है. इसकी जड़ों का उपयोग Night Blindness के इलाज में किया जाता है. पेट के कीड़ों मारने वाली दवा, डायरिया, खून साफ करने वाली दवा, डायबिटीज की दवा बनाने में इसका इस्तेमाल किया जाता है.

पलाश के पौधे की जड़ में वायुमंडल में नाइट्रोजन को स्थिर करने वाले बैक्टीरिया या जीवाणु पाए जाते हैं. इसके फूलों में परागण की क्रिया मुख्य रूप से पक्षियों द्वारा होती है. इसी वजह से इसे parrot tree भी कहा जाता है.

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