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रोज खाते हैं समोसे, क्या कभी सोचा है तिकोना ही क्यों होता है इसका आकार?

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समोसे खाना तो आपको भी पसंद ही होगा. बच्चों से लेकर बड़ों तक सबको यह पसंद होता है. चटनी के साथ गरमा-गरम समोसे खाने का मजा ही अलग होता है. भारत के हर कोने में लोगों को समोसे पसंद है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि समोसे का आकार तिकोना ही क्यों होता है. इस सवाल का जवाब शायद ही आपको पता होगा.

कहां से आया समोसा 

ऐसा कहा जाता है कि भारत में समोसा ईरान से आया. समोसे का पहली बार जिक्र 11वीं सदी में फारसी इतिहासकार अबुल-फजल बेहाकी की लेखनी में मिलता है. उन्होंने इसमें मुहम्मत गजनवी साम्राज्य के शाही दरबार में पेश की जाने वाली ‘नमकीन’ चीज की चर्चा की है जिसमें कीमा और मेवे भरे होते थे जिसे खस्ता होने तक पकाया जाता था.

विशेषज्ञ पुष्पेश पंत का कहना है कि समोसा ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान पहुंचा. तब तक इसमें काफी बदलाव हो चुके थे. यह मध्य एशिया की पहाड़ियों से गुजरते हुए भारत पहुंचा, जहां इस में काफी बदलाव हुए और इसका अंदाज भी बदल गया. समोसा किसानों का पकवान बन गया

समोसा तिकोना क्यों होता है इसके बारे में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है. लेकिन ऐसा कहा जाता है कि समोसा शब्द की उत्पत्ति फारसी शब्द संबूसाग से हुई जिससे कई सारे शब्दों की व्युत्पत्ति हुई है, जैसे- संबासाक, सानबुसक, सनबसज या यहां तक कि समसा भी. अब चूंकि समोसी का ऑरिजिन मध्य एशिया है और मध्य एशिया में समसा का एक अर्थ पिरामिड भी माना जाता है और यह सब जानते ही हैं कि पिरामिडों का आकार तिकोना होता है. इसीलिए यह मान लिया गया कि समोसे के तिकोना होने के पीछे की यही वजह रही होगी..

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