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भारतीय रेल के ड्राइवरों को 163 साल बाद मिली थी टॉयलेट की सुविधा, जानिए उससे पहले क्या होता था

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भारतीय रेल दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है. हर रोज करोड़ों यात्री ट्रेन से यात्रा करते हैं. ट्रेन से यात्रा के दौरान आपने भी टॉयलेट यूज़ किया होगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय ट्रेनों में कुछ सालों पहले तक टॉयलेट की सुविधा नहीं थी. भारत में पहली ट्रेन 16 अप्रैल 1853 को मुंबई से ठाणे के बीच चलाई गई थी. 1999 में पहली बार ट्रेन में यात्रियों के लिए टॉयलेट की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी. उस समय यह सुविधा फर्स्ट क्लास ट्रेन के यात्रियों को ही मिलती थी. लेकिन बाद में सभी श्रेणी के यात्रियों को टॉयलेट की सुविधा मिलने लगी.

लोको पायलट को कब मिली शौचालय की सुविधा 

अगर लोको पायलट यानी ट्रेन के ड्राइवरों की बात करें तो उन्हें यह सुविधा 2016 में मिलना शुरू हुई. 1853 से लेकर 2016 तक भारतीय ट्रेनों को चलाने वाले चालकों को शौच के लिए ट्रेन के रुकने का इंतजार करना पड़ता था और इंजन से बाहर निकलकर टॉयलेट जाना होता था. 2016 से पहले कई बार ट्रेन ड्राइवरों के शौच की समस्या की वजह से लेट हो जाती थी. 

सुरक्षा कारणों की वजह से इंजन में नहीं थे टॉयलेट  

2016 से पहले तक भारतीय रेल के लोको पायलटों को लंबे समय तक टॉयलेट जाने के लिए इंतजार करना पड़ता था. सुरक्षा कारणों की वजह से भारतीय रेलवे इंजनों में टॉयलेट की सुविधा उपलब्ध नहीं करवा पा रहा था. लेकिन लंबे विचार-विमर्श और जांच-पड़ताल के बाद आखिरकार रेलवे ने 2016 में ट्रेन के इंजनों में टॉयलेट बनाने का काम शुरू कर दिया.

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