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GPS नेविगेटर को भी मात देता है शार्क का दिमाग, जाने कैसे विशालकाय समंदर में खोज लेती है सटीक रास्ता

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जब भी हमें किसी अनजान जगह पर जाना होता है तो हम गूगल मैप का सहारा लेते हैं. लेकिन क्या आपने सोचा है कि समंदर में रहने वाले वाली शार्क को रास्ता कैसे पता चलता होगा. हाल ही में एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शार्क के पास प्राकृतिक जीवीएस नेविगेटर होता है, जिससे वह कोई भी रास्ता अच्छे से पता कर लेते हैं.

शार्क अपने शिकार का पता लगाने और उन तक पहुंचने के लिए इलेक्‍ट्रोसेंसिंग क्षमता का इस्तेमाल करती हैं, वह दूसरे जलीय जीवो की तरह ही मैग्नेटिक फील्ड का सहारा लेकर शिकार करती हैं और फिर अपने स्थान पर वापस चली जाती हैं. हालांकि अभी तक यह साबित नहीं हो पाया है.

फ्लोरिडा स्थित एक फाउंडेशन के रिसर्चर्स ने इसका पता लगाने के लिए शार्क फैमिली पर रिसर्च किया, जिसमें उन्होंने पाया कि यह शार्क हर साल एक स्थान पर वापस लौट आते हैं. इससे यह पता चलता है कि शार्क को पानी के अंदर अपना मूल स्थान पता होता है और वह लंबी दूरी के बाद भी यहां लौट आती हैं.

रिसर्च में आर्टिफिशियल मैग्नेट फील्ड तैयार किया गया जिसमें यह पता चला कि शार्क ने मैग्नेट फील्ड के आधार पर ही लोकेशन का पता लगाया. रिसर्चर्स ने यह भी कहा कि इस बात की संभावना बहुत कम है कि उन्‍होंने जिस प्रजाति के शार्क पर यह रिसर्च किया है, दूसरे प्रजाति के शार्क में ऐसा न देखने को मिले.  द ग्रेट व्हाइट शार्क दक्षिण अफ्रीका से ऑस्ट्रेलिया जाकर वापस लौट आती हैं. शार्क की  य प्रजाति 9 महीनों में 20,000 किलोमीटर की दूरी तय करती है और अपने मूल स्थान पर वापस आ जाती है.

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