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अब जानलेवा बीमारियों का इलाज करेंगे मच्छर, वैज्ञानिक खास एक्सपेरिमेंट को दे रहे हैं अंजाम

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मच्छरों से बचने के लिए लोग ना जाने क्या-क्या करते हैं. लेकिन फिर भी मच्छर रात में सोते समय बहुत परेशान करते हैं. मच्छरों से डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया जैसी जानलेवा बीमारियां भी होती है. लेकिन अब मच्छरों की वजह से ही इन बीमारियों को मात देने की तैयारी भी हो रही है. वैज्ञानिक खास रिसर्च कर रहे हैं. फ्लोरिडा मॉस्‍क्विटो कंट्रोल डिस्ट्रिक्‍ट और ब्रिटिश फर्म बायोटेक ऑक्जिटेक ने एक ऐतिहासिक घोषणा की है. यह दोनों कंपनी एक साथ मिलकर ऐसे मच्छर का लार्वा तैयार कर रहे हैं, जो इंसानों को नहीं काट सकेंगे.

अगर यह खोज सफल हो जाती है तो ज़ीका, येला फीवर, डेंगू जैसी खतरनाक बीमारियों को रोकने में मदद मिलेगी. रिसर्च के मुताबिक, हर हफ्ते मच्छरों की एक प्रजाति के तकरीबन 12,000 प्रजातियों को तैयार किया जाएगा, जिसकी शुरुआत पिछले हफ्ते से हो चुकी है और यह 12 हफ्तों तक जारी रहेगी. इन्हें अलग-अलग लोकेशन से तैयार किया जाएगा, जिनमें दो जगह कुडजो की, एक रैमरोड की और तीन वाका की के होंगे. ये जगहें फ्लोरिड के टापू हैं.

दरअसल, वैज्ञानिक चाहते हैं कि आगामी समय में करोड़ों की संख्या में ऐसे मच्छर उत्पन्न किए जाएं, ताकि मौजूदा समय में मच्छर से होने वाली बीमारियों को खत्म किया जा सके. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह मच्छर काटने वाली लोकल फीमेल मच्छरों के साथ मेट करेंगे, जिससे फीमेल ऑफस्प्रिंग के जीने के लिए स्थिति अनुकूल नहीं रहेगी और इस तरह आने वाले भविष्य में इन प्रजाति के मच्छर की संख्या तेजी से कम होती जाएगी.

नए तैयार किए गए मच्छरों में दो तरह के जीन होंगे- पहला जीन फ्लोरेसेंट मार्कर होंगे, जो खास तरह की लाल रोशनी में चमकेंगे. जबकि दूसरा जीन सेल्‍फ लिमिटंग होगा, जिसका काम फीमेल मच्छरों में ऑफिस की क्षमता को कम करना होगा. वैज्ञानिकों ने स्पष्ट कर दिया है कि जेनेटिक मोडिफिकेशन की मदद से तैयार किए गए मच्‍छरों से इंसानों, जानवरों या पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होगा.

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