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अगर हजारों किलोमीटर दूर फैली रेल की पटरी में आ जाए करंट तो क्या होगा? कभी सोचा है

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भारतीय रेल नेटवर्क दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है. हमारे देश में बिजली, डीजल, सीएनजी और भाप से ट्रेनें चलती हैं. लेकिन भाप से चलने वाली ट्रेन कुछ विशेष मौकों पर ही चलती है. भारत में इलेक्ट्रिक ट्रेनें 25,000 वोल्ट की बिजली से चलती है. ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल भी उठते होंगे कि 25000 वोल्ट की बिजली के बावजूद पटरियों में करंट क्यों नहीं आता. जबकि ट्रेन के साथ-साथ पटरिया भी लोहे की होती है.

क्यों नहीं आता पटरियों में करंट 

भारतीय रेल द्वारा बिछाने वाली पटरियों में बिजली का प्रवाह ना के बराबर होता है. किसी भी रूट पर रेलवे ट्रैक के पूरे हिस्से में बिजली का प्रवाह नहीं होता है. करीब 20 फीसदी लाइन में ही करंट का फ्लो होता है. ये फ्लो भी आमतौर पर सिग्नल और रेलवे स्टेशन के आसपास की पटरियों में ही होता है और इसका वोल्टेज काफी कम होता है. इसलिए पटरी छूने पर भी बिजली का झटका महसूस नहीं होता. 

इतना ही नहीं रेल की पटरियों को बिछाते समय जगह-जगह पर अर्थिंग डिवाइस लगाई जाती है जिससे पटरियों में पहुंचने वाला करंट जमीन में चला जाता है और पटरियों में बिजली का ठहराव नहीं हो पाता, जिससे किसी को कोई नुकसान नहीं होता

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