hindi

सीमेंट के आविष्कार से पहले ही बन गया था ताजमहल, फिर इतने पत्थर कैसे चिपकाए गए? बहुत ही शानदार था तरीका…..

0 18

ताजमहल दुनिया के अजूबों में से एक माना जाता है. इसे प्यार का प्रतीक भी माना जाता है. ताजमहल देखने के लिए दुनिया भर से लोग आते हैं और इसकी खूबसूरती का गुणगान करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ताजमहल जब बनाया गया था उस वक्त सीमेंट भी नहीं होती थी. तो इसके पत्थरों को कैसे चिपकाया गया. अगर नहीं तो आज जान लीजिए.

ताजमहल को बनाने में लगभग 22 साल लगे थे. इसका निर्माण 1643 में पूरा हुआ था. लेकिन परियोजना के अन्य चरणों में काम 10 साल तक जारी रहा. ऐसा कहा जाता है कि 1653 में ताजमहल को बनने में लगभग 32 मिलियन रुपये लगे थे, जो आज के हिसाब से लगभग 52.8 बिलियन रुपये होगा. 1983 में यूनेस्को ने विश्व विरासत स्थल के रूप में इसे नामित किया.

सीमेंट का आविष्कार 1824 में हुआ था. लेकिन ताजमहल उससे पहले ही बन चुका था. मार्बल चिपकाने के लिए आजकल कई तरीके मौजूद हैं. लेकिन उस समय पत्थरों को चिपकाने के लिए एक खास तरह का मेटेरियल तैयार किया गया था. ताजमहल की नींव के लिए एक अलग-सा घोल बनाया गया था, जिसका नाम सरूज बताया जाता है.

यह लाइन, चिकनी मिट्टी आदि से बनाया जाता है. इसके अलावा इसमें गुड़, दालें, चीनी, राल, गोंद आदि भी मिलाया गया था. ताजमहल की पकड़ इतनी मजबूत है कि आज भूकंप, तूफान, बारिश, गर्मी-सर्दी का इस पर कोई असर नहीं पड़ता है.

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.