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अरब सागर की अपेक्षा बंगाल की खाड़ी में क्यों आते हैं ज्यादा तूफान, जाने दोनों में क्या है अंतर

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अरब सागर में चक्रवाती तूफान ताउते ने हाल ही में तबाही मचाई. सबसे ज्यादा महाराष्ट्र, गोवा और गुजरात इस तूफान से प्रभावित हुए. देश के कई अन्य हिस्सों पर भी इसका असर पड़ा. एक तूफान के जाने से पहले ही मौसम वैज्ञानिकों को दूसरे तूफान की आहट मिल गई, जो अरब सागर में ना बनकर बंगाल की खाड़ी में बन रहा है. यह तूफान उड़ीसा, पश्चिम बंगाल को सबसे ज्यादा प्रभावित कर सकता है. इस तूफान को यास नाम दिया गया है. 

अरब सागर और बंगाल की खाड़ी भारत के दो अलग-अलग छोरों पर है. एक पश्चिम में है तो दूसरा पूरब में. लेकिन दोनों में काफी अंतर है. ज्यादातर तूफान पूर्व में स्थित बंगाल की खाड़ी से ही आते हैं और यह अरब सागर के मुकाबले ज्यादा भयानक होते हैं. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक अरब सागर के मुकाबले बंगाल की खाड़ी ज्यादा गर्म है. इस कारण यहां पर बनने वाले कम दबाव के क्षेत्र को तूफान में बदलने के लिए पर्याप्त मौसमी मदद मिल जाती है. वहीं हवा के बहाव के लिए भी बंगाल की खाड़ी उपयुक्त है. इस कारण तूफान विकराल रूप धरते हैं और ज्यादा तबाही मचाते हैं. 

हालांकि हाल के समय में अरब सागर में भी मौसमी गतिविधियां तेजी से बदल रही हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक अब ग्लोबल वॉर्मिंग के चलते अरब सागर के तापमान में भी बढ़ोतरी होने लगी है, जिस वजह से पहले के मुकाबले ज्यादा तूफान बन रहे हैं. आमतौर पर साइक्लोन मानसून से पहले मई-जून और मानसून के बाद अक्टूबर नवंबर के महीने में आते हैं. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में प्रतिवर्ष 4 और अरब सागर में एक चक्रवाती तूफान आते हैं.

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