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आखिर बाजार में क्यों नहीं मिल रही ब्लैक फंगस की दवा, ये है वजह

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ब्लैक फंगस की दवा एंफोटेरीसीन बी की कई राज्यों में भारी कमी है, जिस वजह से हाहाकार मचा हुआ है. ऐसे में सरकार ने पांच और कंपनियों को एंफोटेरीसीन बी बनाने की मंजूरी दे दी है. ब्लैक फंगस को 11 से ज्यादा राज्यों में महामारी घोषित कर दिया गया है. लेकिन इस दवा की बाजार में इतनी कमी क्यों हो रही है, यह लोग समझ नहीं पा रहे.

दरअसल, वर्तमान में भारत सीरम एंड वैक्सीन,बीडीआर फॉर्मास्यूटिकल्स,सन फॉर्मा,सिप्ला और लाइफ केयर इन्नोवेशंस नामक कंपनियां एंफोटेरीसीन बी भारत में प्रोड्यूस करते हैं. माइलन एंटीफंगल ड्रग इम्पोर्ट करता है. कंपनी दावा कर रही है कि बढ़ती हुई मांग को देखते हुए जून महीने से डिमांड के मुताबिक प्रोडक्शन बढ़ा लिया जाएगा.

कंप्लैक्स मॉलीक्यूल की दवा तैयार करने में लगभग 25 दिन लग जाते हैं. मई महीने में पांच लाख 26 हजार वाइल्स देश को मुहैया कराया जा सका है. बता दें कि एंफोटेरीसीन बी का इस्तेमाल काला ज्वर में भी होता है. डॉ अरूण शाह कहते हैं कि एंफोटेरीसीन बी का प्रयोग पांच मिलीग्राम प्रति किलो के वजन के अनुसार होता है.

वर्तमान में कंपनियों को एंफोटेरीसीन बी के प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए कुछ मॉलीक्यूल को आयात करना पड़ता है. इसमें जरूरी लिपिड फॉरम्यूलेशन को तैयार करने वाला एक मात्र देश स्वीटजरलेंड है. यहां से जरूरी लिपिड फॉरम्यूलेशन के खेप आने में दिक्कतें हो रही थी, जिसे सरकार दूर करने में मदद कर रही है. दवा के लिए जरूरी फिल्टर्स  के लिए भी भारत अमेरिका पर निर्भर है. इसी वजह से भारत में यह दवाई लिमिटेड मात्रा में तैयार हो पाती है.

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