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क्या सच में मनहूस है कोहिनूर हीरा? जिस सुल्तान के पास पहुंचा खत्म हो गई उसकी सल्तनत, जानिए पूरी कहानी

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कोहिनूर हीरा क्या वाकई श्रापित है. ऐसा कहा जाता है कि कोहिनूर जिसके पास पहुंच गया, उसकी बर्बादी तय है. लोग ये भी पूछते हैं कि भारत से कोहिनूर कैसे ब्रिटेन चला गया और उसे वापस क्यों नहीं लाया जा रहा. कोहिनूर भारत से ब्रिटेन कैसे पहुंचा, इसका इतिहास बहुत बड़ा है. 

कोहिनूर के श्रापित के होने का किस्सा भी है जिसके बारे में कहा जाता है कि‘कूह-ए-नूर’ (फारसी जिसका हिंदा अर्थ होता है रोशनी का पर्वत) जहां भी गया, वहां विनाशलीला रची गई. देखते-देखते सब कुछ बर्बाद हो गया. कोहिनूर का अर्थ भले ही रोशनी का पर्वत हो. लेकिन इस बेशकीमती हीरे की वजह से कई राजाओं की सल्तनत खत्म हो गई. कहा जाता है कि इसी आधार पर इसको श्रापित भी बताया जाता है.

ऐसी बातें अलग-अलग घटनाओं के आधार पर कही जाती हैं. हीरे के सफर की शुरुआत काकतीय वंश से हुई जहां से कोहिनूर तुगलक वंश के पास आया. यह हीरा जब भी किसी शासक के पास पहुंचा, शुरुआत में उसका वर्चस्व बढ़ा. लेकिन उसका अंत भी बुरी तरह हो गया. शाहजहां ने भी अपने सिहासन में कोहिनूर को जड़वाया था, लेकिन उनके साथ क्या हुआ, यह सब जानते ही हैं. पहले तो उनकी पत्नी ने उन्हें छोड़ दिया. फिर बेटे ने नजर बंद कर सत्ता हथिया ली.

नादिरशाह ने मुगलों को हराकर कोहिनूर हीरे को अपने कब्जे में कर लिया और वह उसे पर्शिया लेकर चला गया. लेकिन कुछ साल बाद ही उसकी हत्या हो गई. इसके बाद यह कोहिनूर हीरा अफगानिस्तान के सुल्तान अहमद शाह दुर्रानी के वंशज शाह शुजा दुर्रानी के पास गया. लेकिन यहां भी उसकी सत्ता जाने लगी. दुर्रानी हीरा लेकर अफगानिस्तान से पंजाब आ गया और उसने कोहिनूर राजा रणजीत सिंह के हवाले कर दिया. 

कोहिनूर मिलने के कुछ दिन बाद राजा रणजीत सिंह की मौत हो गई और यह कोहिनूर विरासत में उनके बेटे दिलीप सिंह को मिल गया. अंग्रेजों ने रणजीत सिंह के साम्राज्य पर हमला कर दिया और कोहिनूर को अपने कब्जे में कर लिया. आज ये हीरा इंग्लैंड में है. इस हीरे के बुरे प्रभाव से बचने के लिए इंग्लैंड की महारानी ने नियम बनाया है कि इसे कोई महिला ही धारण करेंगी. हालांकि ऐसा माना जाता है कि फिर भी कोहिनूर की मनहूसियत खत्म नहीं हुई. दुनिया भर में फैली अंग्रेजों की हुकूमत इसके बाद खत्म हो गई.

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