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एक मछली की वजह से अमीर हो रहे हैं बलूचिस्तान के मछुआरे, जानिए कैसे

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पिछले कई दिनों से बलूचिस्तान का एक मछुआरा काफी सुर्खियों में है. ग्वादर जिले में रहने वाले मछुआरे की पिछले दिनों एक लॉटरी लग गई, जब उसने एक मछली को पूरे 72 लाख रुपए में बेचा. यह मछली बहुत ही दुर्लभ है, जिससे उस मछुआरे की किस्मत बदल गई. 

ग्वादर के रहने वाले मछुआरे साजिद हाजी अबाबकर के हाथ 42 किलोग्राम की क्रोकर मछली लग गई, जिसे अब देश का सबसे महंगा सीफूड करार दिया जा रहा है. इस मछली के लिए बोली लगाई गई, जो 86.4 लाख तक पहुंच गई. हालांकि डिस्काउंट की परंपरा के चलते उन्होंने मछली को 72 लाख रुपए में बेच दिया. 

यूरोप और चीन में है बहुत ज्यादा मांग 

अटलांटिक क्रोकस फिश की यूरोप और चीन में बहुत ज्यादा मांग रहती है. इसके मीट और स्किन के अलावा मछली की हड्डियां भी मेडिकल साइंस के हिसाब से बहुत फायदेमंद होती हैं. अब्‍दुल रहीम बलोच एक मरीन बायोलॉजिस्‍ट हैं और ग्‍वादर में एनवायरमेंट डेवलपमेंट अथॉरिटी के असिस्‍टेंट डायरेक्‍टर हैं. उन्होंने बताया कि कुछ मछलियां अपने मीट की वजह से मंहगी होती है. लेकिन क्रोकर फिश का प्रयोग मीट के अलावा दवाइयों और सर्जरी में भी किया जाता है. इस मछली के कुछ भाग बहुत ज्यादा अमूल्य होते हैं. 

पिछले दिनों भी बलूचिस्तान में एक मछुआरे को 1.2 किलोग्राम की क्रोकर फिश मिली थी, जो लगभग 7.8 लाख रुपए में बिकी थी. इसका वजन 20 से 90 किलोग्राम तक हो सकता है. हालांकि इसे पकड़ने के लिए मछुआरों को काफी मेहनत करनी पड़ती है. 

क्या है क्रोकर फिश के फायदे

क्रोकर फिश के शरीर में पाए जाने वाले एयर ब्लेंडर का प्रयोग सर्जरी के लिए होता है. इसकी मदद से वो टांके बनाए जाते हैं, जो सर्जरी के बाद काम आते हैं और इंसानों के शरीर में आसानी से घूल जाते हैं और कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता. इसका प्रयोग हार्ट सर्जरी जैसे मुश्किल कामों में सबसे ज्यादा होता है. इस मछली में प्रोटीन और माइक्रोएलिमेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं.

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