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बदल गए घर और दुकान किराए पर देने के नियम, यहां जाने सभी सवालों के जवाब

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बुधवार को केंद्र सरकार ने सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में सर्कुलेशन के लिए मॉडल टेनेन्‍सी एक्‍ट को मंजूरी दे दी. अब किराए पर घर और मकान देने के नियम बदल गए हैं. अक्सर मालिक और किरायेदारों के बीच किराए के मकान या दुकान को लेकर विवाद होता रहता था. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. नए नियमों में किराए और मकान मालिक दोनों के हितों का ध्यान रखा गया है.

नए कानून के तहत, अब कोई मकान मालिक घर के लिए किराएदार से 2 महीने से ज्यादा की रकम सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में नहीं ले सकता और अगर अब किराया नहीं मिलता या किराएदार मकान खाली नहीं करता तो मकान मालिक उससे 2 से 4 गुना ज्यादा तक किराया वसूल कर सकता है.

आवासीय घरों के लिए अधिकतम 2 महीने का किराया सिक्योरिटी के रूप में और कमर्शियल प्रॉपर्टी के लिए अधिकतम 6 महीने का किराया सिक्योरिटी मनी के रूप में लिया जा सकता है. अब किराए के लिए लिखित एग्रीमेंट करवाना अनिवार्य होगा. जब तक रेंट एग्रीमेंट में किसी तरह की जिम्मेदारी का जिक्र नहीं होगा, तब तक हर तरह के काम के लिए मकान मालिक ही जिम्मेदार होंगे.

किराएदार अगर मालिक की प्रॉपर्टी को जानबूझकर नुकसान पहुंचाता है तो इसके लिए वह जिम्मेदार होगा. जब तक रेंट एग्रीमेंट जारी रहेगा, तब तक मकान मालिक किराएदार से बाहर नहीं निकाल सकते. अगर दोनों पार्टियां आपस में सहमत हैं, तभी रेंट एग्रीमेंट को खत्म किया जा सकता है. अगर किराएदार रेंट एग्रीमेंट पूरा होने के बाद भी घर नहीं छोड़ रहा तो इसे डिफॉल्ट माना जाएगा और उसे हर्जाना देना होगा. रेंट एग्रीमेंट में तय अवधि के बीच में किराया नहीं बढ़ाया जा सकता.

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