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चीन से लड़ेंगे AI से लैस भारतीय आर्मी के टैंक, केमिकल और बायोलॉजिकल वेपन भी होंगे इसके आगे बेअसर

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भारतीय आर्मी ने 1 साल पहले पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर भीष्म टैंक तैनात किए थे. अब रक्षा मंत्रालय सेना के लिए ऐसे टैंकों की खरीद की योजना पर विचार कर रहा है जिन्हें फ्यूचर टैंक्स के तौर पर जाना जाता है. सेना की योजना इन फ्यूचर टैंक्स को साल 2030 तक शामिल करने की है, जिसके लिए विदेशी टैंक्‍स की खरीद के लिए टेंडर जारी करने का मन बना लिया है. सेना का प्लान स्‍ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के तहत टैंक खरीदने का है. ये टैंक्स ऊंचाई वाली जगहों के अलावा, मैदानी इलाकों, नदी के किनारों, रेगिस्तान जैसी जगहों पर इस्तोमाल किये जा सकते हैं. ये टैंक सेना के पास अगले 40 से 50 सालों तक मेन बैटल टैंक के तौर पर रहेंगे.

AI बनाएगी इन्‍हें खतरनाक

सेना ऐसे टैंक्स की तलाश कर रही है, जो अन्य टैंकों की तुलना में ना केवल बेहतर होंगे बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) से भी लैस होंगे. यह टैंक पारदर्शी बख्तरबंद के साथ नेटवर्क आधारित इन्वायरमेंट में ऑपरेट करने में भी सक्षम होंगे और रात और दिन में रियल टाइम बेस ऑपरेशंस को भी अंजाम दे सकेंगे. ये उच्च तापमान में भी हथियारों का इस्तेमाल किए जाने योग्य होंगे. समें 2 से 3 क्रू मेंबर्स की जगह होगी.

इन टैंक्स को ऊंचाई वाले इलाकों पर, अत्‍यधिक रेंज पर आसानी से प्रयोग किया जा सकेगा. ये अलग-अलग खतरों का पता लगाकर इन्‍हें तुरंत ही नष्‍ट कर सकेंगे. इसके अलावा गन ट्यूब लॉन्‍च्‍ड एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल भी इनमें फिट होगी. सेना चाहती है कि इन टैंक में एक्सप्‍लोरिसव रिएक्टिव आर्मर (ERA) के साथ ही साथ केमिकल बायोलॉजिकल रेडियोलॉजिकल न्‍यूक्लियर (CBRN) प्रोटेक्‍शन की क्षमता भी होनी चाहिए. 

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