hindi

दवा कंपनियों के लिए बहुत कीमती है ये केकड़ा, 11 लाख रुपए लीटर में बिकता है खून, जानिए क्या है खासियत

0 20

जब भी आपसे दुनिया की महंगी चीजों के बारे में पूछा जाता है तो लोग हीरे जवाहरात का नाम लेते हैं. लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि केकड़ा भी बहुत कीमती हो सकता है. केकड़े का खून बहुत महंगा बिकता है. वैज्ञानिक आधार पर इसकी पुष्टि हो चुकी है. हॉर्सशू केकड़े का खून हीरे-जवाहरात से भी महंगा बिकता है.  इस केकड़े का आकार घोड़े के नाल की तरह होता है, इसी वजह से इसका नाम हॉर्सशू क्रैब यानी घोड़े के नाल वाला केकड़ा है. आपको यह जानकर भी हैरानी होगी कि इस केकड़े का खून लाल नहीं बल्कि नीले रंग का होता है. 

क्यों इतना महंगा होता है 

हॉर्सशू क्रैब के खून की मांग बहुत ज्यादा है. एक गैलन यानी लगभग 4 लीटर की कीमत 60,000 डॉलर यानी 44 लाख रुपए. यानी 1 लीटर के लिए लगभग 11 लाख चुकाने होंगे. इस केकड़े के खून में कॉपर बहुत ज्यादा मात्रा में पाया जाता है. इतना ही नहीं इसके खून में लिमुलस एमिबेकाइट लाइसेट या एलएएल (LAL) पाया जाता है, जिसकी मदद से किसी भी चीज में मिलावट की पहचान आसानी से की जा सकती है.

कहां होता है इस्तेमाल 

वैक्सीन टेस्टिंग के लिए वैज्ञानिक पहले खरगोशों को इंजेक्शन देते थे और लक्षणों का इंतजार करते थे. खरगोश में कुछ ही देर बाद लक्षण दिखने लगते थे. लेकिन 1970 में एलएएल के इस्तेमाल को मंजूरी मिल गई जिसके बाद मेडिकल की दुनिया में बहुत कुछ बदलाव हुआ. हॉर्सशू के खून से निकाले गए एलएएल की कुछ बूंदें मेडिकल डिवाइस या वैक्सीन पर डाली जाती हैं. डाले जाने के कुछ ही सेकेंड बाद एलएएल किसी भी ग्राम निगेटिव बैक्टीरिया को जेली कोकून में कैद कर देता है. एलएएल बैक्टीरिया को मार देता है.

एलएएल को ज्यादा से ज्यादा मात्रा में निकाला जा सके, इसके लिए दवा कंपनियां बड़ी मात्रा में हॉर्सशू क्रैब पकड़ते हैं. हर साल मेडिकल इंडस्ट्री लगभग 6,00,000 हॉर्सशू क्रैब पकड़ती है जिनमें से 30 परसेंट से खून निकाला जाता है. 30 परसेंट केकड़े ऐसे होते हैं जो टेस्ट में पास नहीं होते और खून निकाले जाने के दौरान मर जाते हैं. जो केकड़े जिंदा बच जाते हैं उन्हें फिर से समुद्र में छोड़ दिया जाता है. 

हालांकि अब इस वजह से इन हॉर्सशू क्रैब की संख्या में तेजी से गिरावट आ रही है. वैज्ञानिकहॉर्सशू क्रैब पर मंडराते हुए खतरे को देखते हुए एलएएल का कोई विकल्प तलाश रहे हैं. जब तक कोई नया विकल्प नहीं मिलता तब तक इसी से काम चलाना पड़ेगा.

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.