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ऐसा करते वक्त आंखे खुली रख पाना है नामुमकिन, अगर कोई टोक दे तो बढ़ जाती है मुश्किल

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छींक आना एक आम प्रक्रिया है. दिन भर में दो चार छींके आ जाएं तो अच्छा ही माना जाता है. इससे नाक में फंसे प्रदूषित कण बाहर निकल आते हैं. लेकिन अगर आपको लगातार छींक आने की समस्या बनी रहे तो यह गंभीर समस्या हो सकती है. जब हम छींकते हैं तो हमारे शरीर के कई अंग एक्टिव हो जाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी यह नोटिस किया है कि जब हम छींकते हैं तो हमारी आंखें बंद हो जाती हैं. हमारे लिए छींकते वक्त आंखे खुली रखना बहुत नामुमकिन है. यह कई बार नुकसानदायक साबित हो सकता है. 

छींकते वक्त क्यों बंद हो जाती हैं आंखें 

हमारे शरीर में होने वाली गतिविधियों को हमारे अन्य अंग पहले ही पहचान लेते हैं और उसी पर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं. ऐसे ही जब हमारे हमें छींक आती है तो हमारे शरीर के बाकी अन्य एक्टिव हो जाते हैं, जिनमें हमारी आंखें भी शामिल हैं. छींक आने में व्यक्ति के ट्राइजेमिनल तंत्रिका को जिम्मेदार माना जाता है. यह हमारी नाक, आंख, मुंह और जबड़ों को नियंत्रित करती है. जब छींक आती है तो इन सभी अंगों पर जोर पड़ता है. इस वजह से हमारी आंखें भी बंद हो जाती हैं. कई बार छींक का दबाव इतनी तेज होता है कि आंखों से आंसू भी निकलने लगते हैं. कभी भी छींक को रोकने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. ऐसा करना नुकसानदायक साबित हो सकता है.

क्यों आती है छींक

हमारी नाक में म्यूकस नाम की एक नाजुक झिल्ली होती है जो बहुत ही संवेदनशील टिश्यू से बनी होती है. जब भी हमारी नाक में कोई बाहरी कण जैसे धूल, धुआं बारीक रेशा आदि आते हैं तो अंदर गुदगुदी होती है, जिससे हमारे दिमाग को एक मैसेज जाता है. हमारा दिमाग उस कण को बाहर निकालने का आदेश देता है और ऐसे में हमारे फेफड़े काम पर लग जाते हैं. फेफड़े आदेश मिलते ही अपने अंदर ऑक्सीजन भर लेते हैं और तेज गति से बाहर की तरफ फेंकते हैं जो छींक के रूप में नाक और मुंह से बाहर निकल जाते हैं.

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