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इंडियन आर्मी की सिख रेजीमेंट, जिससे चीन आज भी खाता है खौफ, जानिए क्यों ?

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चीन की पीएलए और इंडियन आर्मी के बीच गलवान घाटी में हुई झड़प को एक साल हो गया है. इस झड़प में 24 साल के सिपाही गुरतेज सिंह समेत चार सैनिक शहीद हो गए थे. इन सैनिकों की बहादुरी के आगे चीनी सैनिक दुम दबाकर भाग गए थे. आज भी चीनी सैनिक भारतीय सेना के सिख सैनिकों से डरते हैं, जिसकी वजह 100 साल पुरानी है.

15 जून 2020 को गलवान घाटी में चीनी सैनिकों और भारतीय सैनिकों में झड़प हुई थी. उस समय भारतीय सेना में पंजाब की घातक प्लाटून के 4 जवान भी शामिल थे. पिछले साल भारत और चीनी सेना आमने-सामने थीं. उस समय चीनी सेना ने पैंगोंग त्‍सो के दक्षिणी किनारे यानी चुशुल की तरफ लाउडस्‍पीकर लगाए थे. दोनों देशों की सेनाओं के बीच टकराव बढ़ गया था. जो लोग इस जगह से वाकिफ हैं उन्‍हें पता है कि चुशुल के ब्रिगेड हेडक्‍वार्टर के मेस पर आज भी लॉफिंग बुद्धा की एक सोने की मूर्ति रखी हुई है.

ऐसा कहा जाता है कि इस मूर्ति को एक सदी पहले सिख रेजीमेंट के जवानों ने जब्त किया था. उस समय सिख सैनिक 8 देशों के उस मिशन का हिस्सा थे जिसमें चीन की बॉक्सर विलियन को खत्म करना था. उस समय सिख और पंजाब रेजीमेंट्स की मदद ब्रिटिश आर्मी ने बाकी रेजिमेंट के साथ ली थी. यह सेना बीजिंग में दाखिल हुई और बॉक्‍सर के लड़ाकों ने विदेशी जवानों को धमकाया. उन्होंने 400 विदेशियों को बंधक बनाकर बीजिंग स्थित फॉरेन लिगेशन क्‍वार्टर में रखा था.

55 दिनों तक संघर्ष हुआ जिसके बाद 20,000 जवान बीजिंग में दाखिल हुए. इनमें से 8,000 जवान ब्रिटिश आर्मी के साथ भारत से गए थे. भारत से गए ज्यादातर जवान सिख और पंजाब रेजीमेंट के थे. ऐसा कहा जाता है कि ब्रिटिश सेना जीत के बाद वहां लूटपाट में लग गई. फ्रांस और रूस के जवानों ने नागरिकों की हत्या की और महिलाओं का बलात्कार किया. लेकिन सिख सैनिक जी-जान से अपने मिशन में जुटे रहे. चुशुल के आर्मी मेस में जो लॉफिंग बुद्धा रखा है, वो उन सामानों में शामिल था, जिसे जवान अपने साथ लेकर आए थे. 

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