hindi

रानी लक्ष्मीबाई ने ठुकरा दी थी अंग्रेजों की 60,000 रुपये की पेंशन, ब्रिटिश हुकूमत से लड़ाई को तैयार की थी अपनी सेना

0 27

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने 18 जून 1858 को ब्रिटिश हुकूमत से लड़ते हुए अपने प्राण त्याग दिए थे. खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी, यह स्लोगन आज भी लोगों को प्रेरणा देता है. रानी लक्ष्मी बाई का जन्म 19 नवंबर 1835 को हुआ था और उनके बचपन का नाम मनुबाई था. 1850 में उनका विवाह झांसी के राजा गंगाधर राव से हुआ. 1851 में वह एक बेटे की मां बनी. लेकिन 4 महीने बाद उनके बेटे का निधन हो गया.

बेटे की मौत के बाद उनके पति की तबीयत भी खराब रहने लगी और उनका 1853 में निधन हो गया. राजा गंगाधर ने अपने बेटे के चचेरे भाई को गोद ले लिया और उसका नाम दामोदर राव रखा. लेकिन अंग्रेजों के कानून के हिसाब से दामोदर राव राजा नहीं बन सकता था. इसी वजह से रानी लक्ष्मीबाई ने महल छोड़ दिया. ब्रिटिश सेना ने उन्हें 60,000 रुपये पेंशन देने की बात भी कही थी. लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया था.

उन्होंने अंग्रेजी सेना से लड़ाई के लिए अपनी खुद की सेना तैयार बनाई, जिसमें महिलाएं भी शामिल थीं. ब्रिटिश सेना से लड़ाई में कई लोगों ने उनकी मदद की. 1857 में अंग्रेजी शासन के खिलाफ जंग का बिगुल बज चुका था. झांसी में रानी ने 14,000 बागियों की सेना तैयार कर ली थी. जब ब्रिटिश सेना झांसी के अंदर दाखिल हुई तो लोगों को उन्होंने लूटना और मारना-पीटना शुरू कर दिया. ऐसे में ब्रिटिश सेना और रानी लक्ष्मीबाई की सेना के बीच जंग छिड़ गई और उनकी सेना अंग्रेजों पर भारी पड़ी.

लेकिन 18 जून 1858 को ग्वालियर के किले को अंग्रेजों ने चारों तरफ से घेर लिया. लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों से युद्ध लड़ा. लेकिन एक अंग्रेजी सैनिक को वह देख नहीं पाईं, जिसने उनके सीने पर तलवार से वार कर दिया. हालांकि उन्होंने उसकी हत्या कर दी. लेकिन उनके घाव से खून तेजी से बह रहा था. वह अपने घोड़े पर सवार होकर जा रही थीं. 

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.