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ट्रेन में चढ़ने से पहले हर बार ड्राइवर को अनिवार्य होता है ये टेस्ट देना, पास होने पर ही चला सकता है रेल

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जब ट्रेन रेलवे स्टेशन से रवाना होती है और अपने गंतव्य तक पहुंचती है तो इस दौरान कुछ लोगों को बहुत मेहनत करनी पड़ती है. रेलवे कर्मचारी कड़ी मेहनत करते हैं और अलर्ट रहते हैं, ताकि ट्रेन को सुरक्षित स्थान तक पहुंचा सके. लोको पायलट की भी इसमें अहम भूमिका होती है. लोको पायलट ट्रेन का नेतृत्व करता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि लोको पायलट को ट्रेन में चढ़ने से पहले हर बार एक टेस्ट देना होता है और उसे पास करना होता है, तभी उसे ट्रेन चलाने की इजाजत मिलती है. 

पास करना होता है ये टेस्ट 

लोको पायलट जब भी कोई ट्रेन ले जाने को तैयार होता है तो उन्हें कुछ जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होती है. सबसे पहले लोको पायलट को अपने अटेंडेंस संबंधी काम करना होता है, ट्रेन जानकारी भी उन्हें दी जाती है. इसके अलावा उन्हें ट्रेन के रूट मैप की जानकारी दी जाती है. चालक का अल्कोहल टेस्ट भी होता है. उन्हें एक मशीन में फूंक मारकर टेस्ट करवाना होता है, ताकि कोई भी व्यक्ति शराब पीकर ट्रेन में ना चढ़े. 

लोको पायलट ये टेस्ट पास करने के बाद ही ट्रेन के इंजन को शुरू कर सकता है. लोको पायलट को ट्रेन को चलाने से पहले उसके इंजन को अच्छे से चेक करना होता है कि कहीं उसमें कोई गड़बड़ी तो नहीं है. अगर ऐसा होता है तो वह पहले ही इस बारे में आगे जानकारी दे देता है. यह काम बहुत ही जिम्मेदारी वाला होता है, जिसमें जरा-सी भी चूक से काफी बड़ा हादसा हो सकता है.

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