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जब अपने बीमार पिता को लेकर दर-दर भटक रहे थे कोहली, किसी ने नहीं की थी उनकी सहायता, डॉक्टरों ने नहीं खोला था दरवाजा

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भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली की विश्व क्रिकेट में तूती बोलती है. विराट कोहली के नाम क्रिकेट के खेल में एक से बढ़कर एक बड़े रिकॉर्ड दर्ज है. विराट कोहली के पास आज किसी भी चीज की कोई कमी नहीं है. लेकिन विराट कोहली की जिंदगी का एक हिस्सा बहुत ही दर्दनाक रहा. जब उन्होंने छोटी सी उम्र में अपने पिता को खो दिया था. कोहली अपने पिता को बचाने के लिए दर-दर भटकते रहे. लेकिन किसी ने उनकी सहायता नहीं की. खुद इस बात का खुलासा विराट कोहली ने किया था.

एक इंटरव्यू में कोहली ने अपने जीवन के सबसे दुख भरे पलों का खुलासा किया था. जिसने उनकी जिंदगी को पूरी तरह से बदल दिया. एमी पुरस्कार विजेता पत्रकार ग्राहम बेनसिंगर ने एक बार कोहली का इंटरव्यू लिया था. इस दौरान कोहली ने अपने पिता की मौत के दौरान अपनी मानसिक स्थिति के बारे में बताया था. बता दें कि 19 दिसंबर 2016 को कोहली के पिता प्रेम कोहली का निधन 54 साल की उम्र में ब्रेन स्ट्रोक के कारण हो गया था. उस समय विराट केवल 18 साल के थे और दिल्ली में रणजी ट्रॉफी खेल रहे थे.

दिल्ली का मैच कर्नाटक के खिलाफ था. उस मैच में कोहली ने दिल्ली को फॉलोऑन से बचाने के लिए 90 रनों की शानदार पारी खेली थी. उसके बाद वह अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे. कोहली ने यह भी बताया कि उन्होंने अपने पिता को अपने सामने अंतिम सांसे लेते देखा. पिता की मौत का उनकी जिंदगी पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा. उस समय कोहली ने अपने भाई से कहा था कि वह देश के लिए खेलना चाहते हैं और पिता का भी यही सपना था तो वे इसे पूरा करेंगे.

कोहली ने कहा- मैं रणजी ट्रॉफी मैच खेल रहा था, जब मेरे पिता का निधन हुआ तो मुझे टीम के लिए अगले दिन बल्लेबाजी करनी थी. सुबह के करीब 2:30 बजे मेरे पिता का देहांत हुआ. मैंने उन्‍हें आखिरी सांस लेते हुए देखा. हम आसपास के डॉक्‍टरों के पास गए, लेकिन किसी ने दरवाजा नहीं खोला. फिर हम उन्‍हें अस्‍पताल लेकर गए लेकिन दुर्भाग्‍य से डॉक्‍टर उन्‍हें बचा नहीं पाए. परिवार के सभी लोग टूट गए और रोने लगे लेकिन मेरी आंखों से आंसू नहीं आ रहे थे और मैं सन्‍न था.

आगे विराट कोहली ने बताया कि पिता की मौत ने उन्हें बुरे समय का सामना करना सिखाया. मेरे पिता चाहते थे कि मैं भारत के लिए खेलूं. बता दें कि इस दौरान विराट कोहली ने यह भी बताया कि सचिन तेंदुलकर बचपन से ही उनके हीरो रहे हैं. कभी भी विराट कोहली ने यह मानने से इनकार नहीं किया है कि वह हमेशा से ही सचिन तेंदुलकर की तरह बनना चाहते थे.

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