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समुद्र के खारे पानी से भारत में कैसे बनता है नमक, यहां जाने सब कुछ

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खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए नमक सबसे जरूरी होता है. अगर नमक कम या ज्यादा हो तो खाने का पूरा स्वाद बिगड़ जाता है. हालांकि क्या आपने सोचा है कि यह नमक कैसे बनता है. नमक समुंदर के पानी से बनता है और इसे सोलर सॉल्‍ट प्रोडक्‍शन नाम दिया गया है. यह नमक बनाने की सबसे पुरानी प्रक्रिया है, जिसमें छिछले तालाबों में समंदर के पानी को इकट्ठा किया जाता है.

सूरज की तेज रोशनी में ज्यादातर पानी भाप बनकर उड़ जाता है और नमक तली में इकट्ठा हो जाता है. इसे मशीनों की मदद से इकट्ठा किया जाता है. पानी सूखने की प्रक्रिया 8 से 10 दिन में पूरी हो जाती है. पानी सूखने के बाद रेत और मिट्टी के साथ कैलशियम कार्बोनेट नीचे बैठ जाता है. मशीन से नमक इकट्ठा करने के बाद इसे धोया जाता है, जिसके बाद इसे पैकेट में भरकर भेज दिया जाता है.

नमक बनाने के लिए दो तरह के पॉन्‍ड्स का इस्तेमाल किया जाता है. पहला इवैपोरेशन पॉन्‍ड जहां पर समंदर यानी झील के खारे पानी को इकट्ठा किया जाता है ताकि वो इवैपोरेट हो सके. दूसरा पॉन्‍ड यानी क्रिस्‍टीलाइजिंग पॉन्‍ड, जहां पर वाकई में नमक तैयार किया जाता है. यह प्रक्रिया चार से पांच महीनों में पूरी होती है.

भारत नमक उत्पादन के मामले में अमेरिका और चीन के बाद तीसरे नंबर पर आता है. भारत में हर साल 230 मिलियन टन नमक का उत्पादन होता है. भारत में सबसे ज्यादा नमक का उत्पादन गुजरात में होता है. गुजरात के कच्छ के रण में 75 प्रतिशत नमक तैयार किया जाता है.

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