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कभी खराब नहीं होता गंगाजल, आखिर क्यों ?

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हिंदू धर्म में गंगाजल को बहुत ही पवित्र माना जाता है. लोग पूजा घरों में गंगाजल को डिब्बे में भरकर रखते हैं. पूजा-पाठ में गंगाजल का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन क्या आपके दिमाग में भी यह सवाल आता है कि इतने दिनों तक डिब्बे में बंद रहने के बावजूद गंगा का पानी क्यों नहीं बहता.

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, लखनऊ के नेशनल बोटैनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक रहे चंद्रशेखर नौटियाल ने रिसर्च किया, जिसके जरिए उन्होंने यह साबित किया कि गंगा के पानी में ई कोलाई बैक्टीरिया को भी मारने की क्षमता है जो कई बीमारियां पैदा करता है.

गंगा हिमालय की गोद गंगोत्री से निकलकर धरती पर आती है. इसमें बैक्टीरिया को मारने की भी शक्ति है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, हिमालय से नीचे उतरती गंगा अपने रास्ते में कई तरह की मिट्टी, खनिज और जड़ी बूटियों से मिलती है, जिनसे मिलकर एक ऐसा मिश्रण तैयार होता है, जिसे अभी तक कोई समझ नहीं पाया है.

आईआईटी रुड़की में पर्यावरण विज्ञान के रिटायर्ड प्रोफेसर देवेंद्र स्वरुप भार्गव के मुताबिक, नदी की तलहटी में ही गंगा को साफ करने वाला विलक्षण तत्व मौजूद है. इतना ही नहीं गंगा के पानी में वातावरण की ऑक्सीजन सोखने की भी जबरदस्त क्षमता है.

गंगा उत्तराखंड के गोमुख हिमनद के निकट गंगोत्री ग्लेशियर से निकलती है और लगभग 2510 किलोमीटर का सफर तय करती है और बांग्लादेश में प्रवेश करती है, जहां यहां गंगा को पद्मा कहा जाता है. गंगा नदी पश्चिम बंगाल मे विश्व प्रसिद्ध सुंदरवन का डेल्टा का निर्माण करती है.

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