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गुरुकुल में एक शिष्य हमेशा उदास रहता था, उसके गुरु उसे हर रोज देखते और सोचते कि कुछ दिन में इसका मन ठीक हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ

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कई बार लोगों से अनजाने में गलतियां हो जाती हैं, लेकिन उसका पछतावा उन्हें रहता है. लोग अपनी गलतियों के लिए जीवन भर दुखी होते रहते हैं. हालांकि ऐसा नहीं करना चाहिए. बीती बुरी बातों को भूलकर आगे बढ़ जाना चाहिए. प्राचीन कथा के मुताबिक, एक समय गुरुकुल में एक शिष्य बहुत उदास रहता था. उसके गुरु हर रोज उसे देखते. वह सोचते कि कुछ दिन में इसका मन ठीक हो जाएगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. शिष्य हमेशा दुखी रहता.


एक दिन गुरु ने उससे कहा- आज तुम शाम को मेरे पास आना. मुझे कुछ बात करनी है. शाम को जब शिष्य गुरु के पास पहुंचा तो गुरु ने उससे कहा- तुम इतना उदास क्यों रहते हो. शिष्य ने बताया- गुरुजी बीते समय में मेरे परिवार में बहुत परेशानी आ गई थी. मेरा मन पुरानी बातों को याद कर दुखी रहता है. मेरा मन पढ़ाई में भी नहीं लगता.
गुरु ने शिष्य से पूछा- क्या तुम नींबू का शरबत पियोगे. तुम्हें अच्छा महसूस होगा. शिष्य शरबत के लिए मान गया. गुरु ने शरबत बनाया और उसमें नमक ज्यादा कर दिया. शिष्य ने जब शरबत पिया तो ज्यादा नमक की वजह से उसका मुंह बिगड़ गया. उसने गुरु से कहा- गुरु जी इसमें नमक बहुत ज्यादा है. गुरु जी ने कहा- अच्छा शायद गलती से ज्यादा डल गया. मैं इसे फेंक देता हूं और दूसरा शरबत बना लेता हूं.
शिष्य ने कहा- गुरु जी इसे फेंकिए मत. इसमें थोड़ी शक्कर और डाल देंगे तो तो मिठास से शरबत का खारापन कम हो जाएगा. गुरु ने कहा- बिल्कुल सही बात है. ऐसे ही हमारे जीवन में बुरा समय आता है तो हमें भी दुख देने वाली बातों को भूलकर जीवन के अनुभवों पर ध्यान लगाना चाहिए. बुरे समय में भी इससे हमारी सोच सकारात्मक रहती है. अगर हम बीते समय की दुख देने वाली बातों को याद करते रहेंगे तो हमारे जीवन का दुख कभी खत्म नहीं होगा.

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