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एक शराबी व्यक्ति के दो बेटे थे, उसकी पत्नी की मृत्यु हो चुकी थी, जब उसके बच्चे बड़े हुए तो वे दोनों भी पिता की तरह नशे की लत से परेशान थे, एक दिन

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लोगों के हालात को देखने का नजरिया ही उनका भविष्य तय करता है. जो लोग नकारात्मक सोचते हैं उनको परेशानियां झेलनी पड़ती है. प्राचीन काल में एक शराबी व्यक्ति के दो बेटे थे. उसकी पत्नी मर चुकी थी. उसके बच्चे जब बड़े हुए तो वह अपने पिता की नशे की लत से परेशान रहते थे. एक दिन पिता की भी मृत्यु हो गई.


जब दोनों लड़के बड़े हुए तो बड़ा भाई तो शराबी हो गया. जबकि छोटा भाई पढ़-लिखकर समाज का सम्मानित व्यक्ति बन गया था. दोनों भाइयों को देखकर लोग आश्चर्य करते थे कि एक भाई शराबी है, लेकिन दूसरा भाई इतना समझदार और सफल इंसान. बड़े भाई से कुछ लोगों ने पूछा- तुम दिन भर शराब पीते हो, लोगों से बिना बात के झगड़ा करते हो. तुम ऐसे क्यों बन गए हो.
शराबी ने उत्तर दिया कि आज मैं जो कुछ भी हूं मेरे पिता की वजह से हूं. वह हमेशा शराब पीते, घर में झगड़ा करते थे. उनको देखकर मैं भी ऐसा ही हो गया. लेकिन लोग जब छोटे भाई के पास पहुंचे और पूछा कि तुम्हारा बड़ा भाई शराबी है कुछ काम नहीं करता. लेकिन तुम सफल और प्रसिद्ध व्यक्ति हो ऐसा, कैसे.
सफल व्यक्ति ने कहा- आज मैं जिस मुकाम पर हूं मेरे पिता की वजह से हूं. लोग उसकी बात सुनकर हैरान रह गए कि दोनों लड़कों के अच्छे बुरे हालात के लिए उन्होंने पिता को ही जिम्मेदार कैसे ठहराया. लोगों ने छोटे भाई से प्रश्न पूछा तो उसने कहा- मेरे बड़े भाई ने पिता की बुरी आदतों को अपना लिया. लेकिन मैंने शुरू से ही सोच लिया था कि मुझे पिता की तरह शराबी नहीं बनना है. मुझे ऐसा काम नहीं करना है जिससे दूसरों को तकलीफ हो. इसीलिए मैंने पढ़ाई की और आज एक सफल व्यक्ति बन गया.
कहानी की सीख
इस कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है कि परिस्थितियां जैसी भी हो, अगर हम सकारात्मक सोच रखेंगे, अच्छा सोचेंगे तो हमारे साथ अच्छा होगा. जो लोग नकारात्मक सोचते हैं उनके जीवन में परेशानियां बनी रहती हैं.

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