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क्रुणाल-हार्दिक पांड्या को 100 रुपये की शर्त लगाकर पिता ने बनाया था ताबड़तोड़ बल्लेबाज, जानिए पूरी कहानी

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हर पिता अपने बच्चों को कामयाब बनाने के लिए कुछ भी कर गुजरता है. हार्दिक पांड्या और कुणाल पांड्या की सफलता के पीछे भी उनके पिता का ही हाथ रहा था. आज हार्दिक और कुणाल पांड्या के पिता इस दुनिया को छोड़ कर जा चुके हैं. लेकिन इन दोनों भाइयों को क्रिकेटर बनाने के पीछे उनके पिता का बड़ा योगदान रहा.

हार्दिक के पिता का दिल का दौरा पड़ने की वजह से शनिवार की सुबह निधन हो गया. हालांकि इस दुनिया को अलविदा कहने से पहले उन्होंने अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा मकसद पूरा कर दिया. अपने दोनों बेटों को क्रिकेटर बनाने के लिए हिमांशु पांड्या ने कई त्याग किए. इतना ही नहीं उन्होंने अपना शहर भी छोड़ दिया था, उन्होंने रिश्तेदारों के ताने सुने. यहां तक कि उनकी बल्लेबाजी पर उन्होंने ₹100 की शर्त तक लगाई.

एक इंटरव्यू में हिमांशु पांडे ने बताया था कि हम सूरत में रहते थे, उस दौरान कुणाल 6 साल का था. मैं उन्हें घर के अंदर बोलिंग कराता था, वह जबरदस्त शॉट खेलते थे. उसकी बल्लेबाजी देख मुझे लगा था कि वह अच्छा क्रिकेटर बन सकता है. इसके बाद में उन्हें सूरत के रांदेड़ जिमखाना में प्रैक्टिस के लिए ले गया, जहां एक मैच के दौरान पूर्व विकेटकीपर किरण मोरे के मैनेजर ने उसे बल्लेबाजी करते देखा. इसके बाद मोरे के मैनेजर ने हमें वड़ोदरा आने को कहा. मैं कुणाल को 15 दिन बाद वडोदरा ले गया, जहां उसकी प्रैक्टिस शुरू हुई.

हिमांशु पंड्या ने यह भी बताया था- मैं कॉलेज के लड़कों को कहता था कि जो मेरे बेटे को आउट करेगा मैं उसे 100 रुपये दूंगा लेकिन डेढ़-दो घंटे तक बल्लेबाजी के बावजूद कोई उसे आउट नहीं कर पाता था.

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