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अगर सारी मधुमक्खियां मर जाएं तो क्या होगा, कभी सोचा है

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मधुमक्खियां इंसानों की जिंदगी से डायरेक्ट रिलेट नहीं करती. वह बगीचों के फूलों से रस चुरा ले जाती हैं. कई बार मधुमक्खियां लोगों को डंक मार देती है जिस वजह से लोगों की मौत तक हो जाती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर सारीमधुमक्खियां मर गईं तो क्या होगा.

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि मधुमक्खियां इंसानों के लिए बहुत जरूरी है. दुनिया भर में मधुमक्खियों की 20,000 प्रजातियां पाई जाती है. अगर मधुमक्खियां फूलों का रस नहीं निकालेगी तो फिर फूल से बनने में बहुत वक्त लगेगा. अगर फूलों के अंदर का रस्म खत्म नहीं होता तो वह फल नहीं बन सकता.

मधुमक्खियों द्वारा फूलों पर बैठना और उनका रस चूसना परागण की प्रक्रिया कहलाता है, जो फल बनाने के लिए बहुत ही आवश्यक चरण है. मधुमक्खियां फूलों पर आकर बैठती हैं और उनका रस चूस्ती है जिससे शहद का निर्माण होता है. इसी दौरान परागकण उसके पैरों और पंखों में चिपक जाते हैं जिससे परागण की प्रक्रिया संपन्न होती है.

दुनिया के प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के मुताबिक, अगर दुनिया की आखिरी मधुमक्खी मर जाए तो उसके 4 साल के भीतर पूरी मानव प्रजाति धरती से नष्ट हो जाएगी.

पराग की प्रक्रिया का सिद्धांत यह बताता है कि मधुमक्खियों के मरने से फलों और सब्जियों का उत्पादन बंद हो जाएगा और सारी चीजें बहुत महंगी हो जाएंगी.

जब मधुमक्खियां नहीं होंगी तो फल नहीं बनेंगे और ना ही बीज बनेंगे, जिससे वृक्ष खत्म होते चले जाएंगे. मधुमक्खियों के मरने के बाद जंगल खत्म होने लगेंगे और ऑक्सीजन की मात्रा भी कम होने लगेगी. मनुष्य के शरीर की शक्ति क्षीण हो जाएगी.

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