Feb 12, 2024, 06:00 IST

क्रिकेट इतिहास के 5 सबसे विवादित बल्ले, जिसके कारण खूब हुआ था हंगामा

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लोगों में क्रिकेट के प्रति दीवानगी देखते ही बनती है. समय बदलने के साथ ही क्रिकेट के खेल में काफी परिवर्तन आया है. पूरा क्रिकेट देखने का नजरिया ही बदल गया है. हर खिलाड़ी तेज गति से बल्लेबाजी करते हुए रन बनाना चाहता है. लेकिन रन बनाने के लिए बल्ले की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. आज हम आपको क्रिकेट इतिहास के उन पांच विवादित बलों के बारे में बताने जा रहे हैं जिस कारण काफी बवाल मचा था. 

गेल का गोल्डन बल्ला 

वेस्टइंडीज के धाकड़ क्रिकेटर क्रिस गेल के गोल्डन बल्ले ने काफी सुर्खियां बटोरी थी. 2015 बिग बैश लीग में गेल ने इसी बल्ले से बल्लेबाजी की थी और 23 रनों की पारी खेली थी. गेल के बल्ले पर काफी विवाद भी हुआ था. कई लोगों का कहना था कि इस बैट के अंदर मैटल लगा हुआ है.

द् मूनगूज

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर मैथ्यू हेडन साल 2010 के आईपीएल में अपने बल्ले के कारण काफी विवादों में रहे. उस संस्करण में एक ऐसे बल्ले का प्रयोग किया था जिसको ‘मूनगूज’ कहा जाता था. इस बल्ले से उन्होंने दिल्ली डेयरडेविल्स के खिलाफ 43 गेंदों में 93 रनों की तूफानी पारी खेली थी. 

रिकी पोंटिंग का कार्बन ग्रेफाइट वाला बल्ला

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पॉन्टिंग 2005 में अपने ग्रेफाइट बल्ले को लेकर काफी विवादों में रहे. एमसीसी ने उनके बल्ले को लेकर आए आईसीसी से शिकायत भी की थी. पोंटिंग के बल्ले की बारीकी से जांच की गई, जिसके बाद एमसीसी ने कहा था कि ऐसे बल्ले का उपयोग करना गैरकानूनी है. 

डेनिस लिली का एलुमिनियम बैट 

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज डेनिस लिली 1979 में एलुमिनियम के बैट साथ एशेज सीरीज के पहले मुकाबले में बल्लेबाजी करने उतरे थे. उनके एलुमिनियम बैट कारण भी काफी विवाद मचा था.

1771 का विशालकाय बल्ला 

क्रिकेट इतिहास में यह पहला मौका था जब क्रिकेट के बैट को लेकर काफी विवाद हुआ. 1771 में अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेले जाते थे. विवाद बढ़ने के बाद क्रिकेट के नियमों में बदलाव करके बल्ले की चौड़ाई की सीमा तय कर दी गई थी. 1771 को चेर्ट्सी और हैंब्लेटन के बीच खेले गए मैच के दौरान थामस व्हॉइट एक ऐसे बल्लेबाज बल्लेबाजी करने उतरे, जिसकी चौड़ाई बहुत ज्यादा थी. बैट बहुत चौड़ा था और स्टंप को पूरा कवर कर लेता था. खिलाड़ियों के पास उनके इस बल्ले के विरोध के अलावा और कोई रास्ता नहीं था.

 

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