Feb 13, 2024, 12:24 IST

20 सालों से अकेले ही कुष्ठ रोगियों की सेवा कर रही हैं जया, ना है कोई संगठन और ना है आमदनी का कोई भी जरिया

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हमारे समाज में कुष्ठ रोगियों की स्थिति बहुत ज्यादा अच्छी नहीं है. लोग इनके साथ ना तो अच्छा व्यवहार करते हैं और ना ही इनकी मदद करते हैं. लेकिन दिल्ली की रहने वाली जया रेड्डी इन लोगों के लिए भगवान द्वारा भेजी गई दूत हैं. पिछले दो दशकों से वह कुष्ठ रोगियों के लिए लगातार काम कर रही है. दिल्ली की जया रेड्डी का कहना है कि यह उनकी जिंदगी का मकसद है और इस काम से उन्हें बहुत खुशी मिलती है. वह आखिरी सांस तक यह काम करती रहेगी.

दरअसल जया बचपन में इस दौर से गुजरी थी. उनके माता-पिता कुष्ठ रोग से पीड़ित थे जिस वजह से उनके माता-पिता को भी ऐसी ही समस्याओं को झेलना पड़ा. उनके पिता भी मरते दम तक कुष्ठ रोगियों की सेवा करते रहे. जया बताती हैं कि बचपन से मैंने काफी तकलीफ झेली है. लोग मुझे ऐसे देखते थे जैसे मैं कोई अजीब चीज हूं. जब मेरे माता-पिता के घावों पर मरहम पट्टी की जरूरत पड़ती थी तो उन्हें अस्पताल और क्लीनिक से दूर भगा दिया जाता था.

जब मेरे टीचर को पता चला कि मेरे माता-पिता को कुष्ठ रोग है तो उन्होंने मेरे साथ अलग बर्ताव करना शुरू कर दिया. मुझे स्कूल में एक अलग बेंच पर बैठाया जाता था. मेरे पास दूसरे बच्चों को आने नहीं दिया जाता था. वह मेरे साथ ऐसा व्यवहार करते थे, जैसे मैं कोई बैक्टीरिया हूं और उन पर छोड़ दूंगी. 

जया किसी संगठन के लिए काम नहीं करती और ना ही उन्हें इसके लिए कोई वेतन मिलता है. वह बस अपनी खुशी के लिए यह काम करती हैं. जया इनका उपचार कराती हैं और उनकी हर काम में मदद करती हैं. चाहे वह पेंशन के लिए कागजी कार्रवाई हो या कुछ और. जया का बेटा एक संस्थान में नौकरी करता है जिससे उनका घर खर्च चलता है.

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