Nov 11, 2023, 19:00 IST

एक संत एक घर के बाहर भिक्षा मांगने के लिए पहुंचे, जब उन्होंने दरवाजा खटखटाया तो एक छोटी सी बच्ची बाहर आई.........

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कहा जाता है कि बच्चे जैसे माहौल में बड़े होंगे, उनमें वैसे ही संस्कार आएंगे। बचपन से ही यदि बच्चों को अच्छे संस्कार मिलेंगे तो ही वे बड़े होकर अच्छे इंसान बनेंगे और अच्छे काम करेंगे। हम आपको एक ऐसे प्रेरक प्रसंग के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे आप अपने बच्चों को अच्छी बातें समझा सकते हैं।

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संत एक घर भिक्षा मांगने के लिए गए तो उस घर से एक छोटी बच्ची आई और संत से बोली कि हम तो बहुत ज्यादा गरीब हैं, आपको दान देने के लिए हमारे पास कुछ भी नहीं है, संत ने उस बच्ची से कहा बेटी मना मत
एक बार एक संत अपने शिष्य के साथ भिक्षा मांगत- मांगते घर के बाहर पहुंच गए। उन्होंने भिक्षा मांगने के लिए आवाज लगाई तो घर के अंदर से एक छोटी बच्ची आई। उसने संत से कहा कि बाबा हम बहुत गरीब है। आपको देने के लिए हमारे पास कुछ नहीं है। कृपया आप आगे जाएं.
बाद में संत ने कहा कि बेटी मना नहीं करते। अगर आपके पास कुछ नहीं है तो आप अपने आंगन की थोड़ी-सी मिट्टी ही दान में दे दीजिए। छोटी बच्ची ने संत की बात मानकर आंगन में से थोड़ी मिट्टी उठाकर भिक्षा पात्र में डाल दी।
ऐसा करने के बाद संत ने बच्ची को आशीर्वाद दिया और आगे चले गए। कुछ दूरी पर शिष्य ने संत से पूछा कि गुरु जी क्या मिट्टी भी भिक्षा में लेने की कोई चीज है। आप ने आखिरकार भिक्षा में मिट्टी क्यों ली।
संत कहा कि वह अभी छोटी बच्ची है। यदि वह अभी से ही मना करना सीख जाएगी तो बड़े होकर किसी को भी दान नहीं करेगी। आज उसने मुझे मिट्टी दान दी। कल उसके मन में दान करने की भावना जागृत होगी। जब वो बड़ी हो जाएगी और दान देने के लिए समर्थ होगी तो वह फल-फूल और धन भी दान में दे पाएगी।
कहानी की सीख
इस कहानी से हमें सीखने को मिलता है कि बचपन से ही बच्चों को सही संस्कार देने चाहिए। उनको अच्छी अच्छी बातें बतानी चाहिए, जिससे कि वे बड़े होकर किसी भी गलत काम में ना पड़े। बड़े होकर वे नेक इंसान बने और अच्छे काम करें।

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