Fri, 30 Jul 2021

देश ऋण और विदेशी ऋण में अंतर, जानिए भारत सरकार के ऊपर कितना ऋण है बचा

देश ऋण और विदेशी ऋण में अंतर, जानिए भारत सरकार के ऊपर कितना ऋण है बचा

आज की दुनिया में शायद ही कोई ऐसा देश होगा जिसने अपने देश को चलाने के लिए ऋण यानी की उधार न लिया हो। दरअसल इसके पीछे कई सारे मुख्य कारण होते हैं और मुख्य कारण यह है कि सरकार का मुख्य उद्देश्य अपने देश के नागरिकों के कल्याण की वृद्धि करना होता है। न कि आमदनी की वृद्धि करना है भारत सरकार के वित्त मंत्री हर साल घाटे का बजट पेश करते हैं। अर्थात हर साल भारत सरकार की आमदनी उनके खर्चों से कम होती है इस प्रकार सरकार का राजस्व घाटा हर साल बढ़ता रहता हैं।

देश ऋण और विदेशी ऋण में अंतर, जानिए भारत सरकार के ऊपर कितना ऋण है बचा

भारत सरकार, रण देश के अंदर और बाहर दोनों जगह से ले सकती है।

जो रेल देश के अंदर ही लिया जाता है उत्तरण को आंतरिक शरण कहा जाता है। यह ऋण देश के अंदर मौजूद बैंकों बीमा कंपनियों राज रिजर्व बैंक कोऑपरेटिव हाउसिंग चल पंडा आदि कंपनियों से लिया जाता है।

देश के बाहर से लिया गया ऋण को विदेशी ऋण कहते हैं। यह मित्र विदेशों इंटरनेशनल संस्थाओं से लिया जाता है। वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स ने अप्रैल में एक रिपोर्ट जारी की थी। जिसका नाम है स्टेटस रिपोर्ट ऑन गवर्नमेंट फॉर 2019 इस रिपोर्ट में बताया गया है कि मार्च 2019 तक देश का कुल सकल घरेलू उत्पाद का 8% हो गया था। जो कि आसान शब्दों में 13 ट्रिलियन रुपए या फिर 1.3 करोड़ हो गया है ।

विदेशी ऋण ज्यादा होना ठीक बात नहीं होती है क्योंकि विदेशी ऋण केवल विदेशी मुद्रा डॉलर जारी से ही चुकाया जा सकता है। देश के ऊपर आंतरिक ऋण होना खतरनाक नहीं है जितना भी विदेशी ऋण उसी कारण भारत सरकार अपने कुल ऋण का अस्तित्व भी देश के अंदर ही रिजर्व बैंक की मदद से घटा कर लेती है। और भारत के राज्य अपने कुल ऋण का 4% देश के अंदर से ही निकाल लेते हैं भारत सरकार को सबसे अधिक मात्रा में आंशिक यानी कि कमर्शियल बैंकों द्वारा जबकि 24% बीमा कंपनियों द्वारा और 15% रिजर्व बैंक द्वारा दिया जाता है।

विश्व बैंक के अनुसार जिन देशों के ऊपर विदेशी ऋण उनकी जीडीपी के 77 परसेंट से ज्यादा हो जाता है। उनके लिए दीर्घकाल में समस्याएं पैदा होने लगती है यदि 70% के बाद रेट 1% और भरता है तो उस देश की आर्थिक विकास दर 1.7 घट जाती है।

आज विश्व में सबसे अधिक कर्ज देने वाला देश जापान है जिसकी जीडीपी 238% है। इसके बाद अमेरिका ने 106% ब्राजील ने 60 8% और फिर भारत ने 60 6% कर्ज ले रखा है।

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