Fri, 30 Jul 2021

कार जैसे हैंडब्रेक ट्रेन में मौजूद क्यों नहीं होते, जानिए इसके पीछे का कारण | GK IN HINDI

कार जैसे हैंडब्रेक ट्रेन में मौजूद क्यों नहीं होते, जानिए इसके पीछे का कारण | GK IN HINDI

आपने अक्सर रेल एक्सीडेंट की खबरें तो सुनी होंगी। इनमें से कुछ खबरें ऐसी होती है। जिसमें बताया जाता है कि ट्रेन के पायलट की को ट्रैक पर लोगों की भीड़ दिखाई दे रही थी। उसमें हॉरर बजाया। लेकिन लोग नहीं हटे और यह हादसा हो गया। अब सवाल यह आता है कि जब लोग उसको दिखाई दे रहे थे तो उसने ब्रेक क्यों हो लगाया। जब 10 लाख की कार में ब्रेक होता हैं। तो क्या 10 करोड़ की ट्रैन में ब्रेक मौजूद नहीं होगा।

कार जैसे हैंडब्रेक ट्रेन में मौजूद क्यों नहीं होते, जानिए इसके पीछे का कारण | GK IN HINDI

तो आपको जानकारी के लिए बता दें कि आपने देखा होगा कि हैंड ब्रेक एक छोटा सा होता है। यह दोनों सीटों के बीच में लगा होता है इसके दोनों सीटों के बीच में लगे होने का बड़ा रीजन होता है तो यह आप जानते ही होंगे कि हैंड ब्रेक लगाने से कार के चारों को एक साथ जमा हो जाते हैं। इसको इमरजेंसी ब्रेक भी कहा जाता है अब हम आपको बताते हैं कि अधिकार 40 किलोमीटर प्रति घंटा स्पीड से ज्यादा स्पीड से चल रही है। तो अचानक हैंड ब्रेक लगा दिया जाए तो काट तत्काल नहीं रुकेगी। बल्कि उसके पीछे हटते हुए आगे तक जायेगी। इस दौरान ड्राइवर का कार पर कंट्रोल भी छूट जाएगा। लेकिन यदि ब्रेक फेल हो जाता है या उसके सामने कोई बड़ा हादसा सुनिश्चित दिखाई दे रहा है तो उसकी तुलना में कार के अंदर बैठे व्यक्ति लगा सकता है इससे जो खतरा है वह कल सकता है।

अगर बात ट्रेन के ब्रेक के बारे में बात करें वही ब्रेक होता है जो सड़क पर चलने वाले ट्रक व कार बस में होता है और वह होता है एयर ब्रेक पाइप होता है जिसमें जोर की हवा भरी होती है। यह हवा नायलॉन के एक ब्रेक शू को पीछे आगे करती है। यह पर रगड़ खाता है और रुकने लगता है। हालांकि असल बात तो यह है कि किसी ट्रेन को 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भागना अपेक्षाकृत आसान होता है। पेचीदा काम होता है उसमें ब्रेक लगना। लोको पायलट के पास दो ब्रेक मौजूद होते हैं एक इंजन के पास दूसरा पूरी ट्रेन के लिए ट्रेन के डिब्बे के है। पहिए पर एक ब्रेक होता है यह सभी आपस में ब्रेक पाइप से जुड़े होते हैं जब रिवर्ब्रेट लीवर को घुमाता है ब्रेक पाइप में हवा का दबाव कम होने लगता है और ब्रेक शू पहिए से रगड़ खाने लगता है अगर 24 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही है। तो लोको पायलट लगा दी तो ब्रेक पाइप का पूरी तरह से खत्म हो जाएगा और गाड़ी केहर पहिए पर लगा ब्रेक शू पूरी तरीके साथ रगड़ खाया लगेगा इसके बावजूद ट्रेन 800 से 900 मीटर तक जाने के बाद ही रुक पाएगी। यानी कि हादसा तो हो ही जाएगा इसके साथ ही यह होता है कि ट्रेन की बोगी आपस में टकरा जाएंगे और फिर पटरी से नीचे उतर जाएंगे।

ट्रेन में हैंड ब्रेक होता है उसे इमरजेंसी ब्रेक कहा जाता है परंतु उसका उपयोग बहुत ही कम अवसरों पर किया जाता है क्योंकि इसको यूज करने की स्थिति में भी खतरा तो बना ही रहता है ट्रेन के अंदर भी यात्री होते हैं। और रेलवे ट्रैक पर भी पायलट को पलक झपकते ही यह फैसला करना होता है कि उसे किस की जान बचानी है

Advertisement