Nov 16, 2023, 13:30 IST

एक बार राजा चंद्रसेन महाकाल की पूजा कर रहे थे, तभी एक ग्वालिन अपने बच्चे के साथ मंदिर के पास गुजर रही थी, उसने...........

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पुराने समय में उज्जैन नगरी में राजा चंद्रसेन महाकाल की पूजा कर रहे थे। उस समय एक ग्वालिन अपने पांच साल के बच्चे के साथ मंदिर के पास गुजर रही थी। उसने बेटे के साथ उस पूजा को देखा।

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ग्वालिन ने घर आकर एक पत्थर का शिवलिंग बनाया और बेटे के साथ पूजा करने लगी। बाद में जब मां ने भोजन के लिए बेटे को आवाज लगाई तो बच्चा उठकर मां के पास नहीं आया।
मां गुस्सा हो गई और बोली, 'ऐसी पूजा क्यों कर रहा है?'
बच्चा आंखें बंद करके बैठा हुआ था। मां ने बेटे की पिटाई कर दी और उस पत्थर को उठाकर फेंक दिया। वह बच्चा पत्थर से लिपट कर रोने लगा और बेहोश हो गया। बाद में जब उस बच्चे को होश आया तो वहां एक सुंदर मंदिर बन चुका था। वह महाकाल मंदिर था। मां देखा कि हमारी पूरी दुनिया ही बदल गई है।
राजा को सूचना दी गई कि महाकाल का इतना सुंदर मंदिर बन गया है। उन दिनों राजा पर आक्रमण करने के लिए कुछ शत्रु राज्य के बाहर तक पहुंच गए थे। उन्होंने महाकाल मंदिर देखा तो वे लौट गए। शत्रुओं को लगा कि जहां इतने बड़े शिव भक्त हैं, वहां शिव जी इनकी रक्षा करेंगे।
उसी समय मंदिर में हनुमान जी प्रकट हुए और उन्होंने बालक को गले लगाया। हनुमान जी बोले, 'गोप वंश को ये बालक आगे बढ़ाएगा। इसकी आठवीं पीढ़ी में महायशस्वी नंद का जन्म होगा और उनके पुत्र के रूप श्रीकृष्ण आएंगे। इस बच्चे का नाम मैं श्रीकर रखता हूं।'
इस तरह ये महाकालेश्वर शिवलिंग की कहानी बन गई।
सीख
इस कथा ने संदेश दिया है कि हमें संतान को बचपन से ही अच्छे संस्कार देना चाहिए। बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी देना आवश्यक है। संस्कार धार्मिक आचरण से आते हैं। जिन बच्चों की शिक्षा अच्छी होती है और संस्कार भी अच्छे होते हैं, वे अपने वंश का नाम रोशन करते हैं।

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